Gujarat Pakistan Se Gujarat Hindustan and Sikka Badal Gaya by Krishna Sobti

Dr. Mulla Adam Ali
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कृष्णा सोबती : गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान’, (उपन्यास) और सिक्का बदल गया (कहानी)

Novel "Gujarat Pakistan Se Gujarat Hindustan" and Story "Sikka Badal Gaya" by Krishna Sobti

         कृष्णा सोबती का जन्म 18 फरवरी,1925 को गुजरात में हुआ था। भारत के विभाजन के बाद गुजरात का वह हिस्सा पाकिस्तान में चला गया है। विभाजन के बाद वे दिल्ली में आकर बस गए और जब से यहीं रहकर साहित्य सेवा कर रही है। उन्हें 1980 में ‘जिंदगीनामा’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। 1996 में उन्हें साहित्य अकादमी का फेलो बनाया गया जो अकादमी का सर्वोच्च सम्मान था। 2017 में इन्हें Bharatiy Sahitya के सर्वोच्च सम्मान gyan peet से सम्मानित किया गया है। कृष्णा सोबती मुख्यतः कहानी लेखिका है। इनकी कहानियां ‘बादलों के घेरे’ नामक संग्रह में संकलित है। इन कहानियों के अतिरिक्त इन्होंने आख्यायित (फिक्शन) की एक विशिष्ट शैली के रूप में विशेष प्रकार की लंबी कहानियों का सृजन किया है जो औपन्यासिक प्रभाव उत्पन्न करती है। ‘ऐ लड़की’ ‘डार से बिछड़ी’ ‘यारों के यार’ ‘तिन पहाड़’ जैसी कथा कृतियाँ अपने इस विशिष्ट आकार प्रकार के कारण उपन्यास के रूप में प्रकाशित भी है। कृष्णा सोबती का निधन 25 जनवरी, 2019 दिल्ली में हुआ।

    इनके उपन्यास ‘सूरजमुखी अँधेरे के’ (1972), ‘जिंदगीनामा’ (1979), ‘दिलोदानिश’ (1993), ‘समय सरगम’ (2000), ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान’ (2017) प्रमुख हैं।

‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान’ (Gujarat Pakistan Se Gujarat Hindustan by Krishna Sobti)

      विभाजन की पृष्ठभूमि पर कृष्णा सोबती का लिखा हुआ उपन्यास ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान’ है। इस उपन्यास में कृष्णा सोबती जी के अपने अनुभव दर्ज है। उपन्यास की शुरुआत दो लक्ष्यों में से होती है जो विभाजन के पहले और बाद के हिंदुस्तान को दिखाते हैं। कृष्णा सोबती इस उपन्यास में अपने माध्यम से लाखों लोगों की उस पीड़ा को व्यक्त करती है जो, एक आजाद देश बनने की खुशी में अपना घर, अपना विरासत, अपनी जमीन, अपनी जिंदगी, अपना मान, अपना सम्मान खोने पर मिली है।

    उपन्यास की भाषा, उसकी संवेदना और अनुभूति को गहरे स्तर पर अभिव्यंजित करती है जो उपन्यास की अन्यतम विशेषता है। इस भाषा के माध्यम से वे तत्कालीन समय की संवेदना को अत्यंत मार्मिकता से व्यक्त करती है। भाषा की स्थानीयता पाठकों को रोमांचित और उद्वेलित करती।

   विभाजन की स्मृतियों को केंद्र में रखकर लिखा गया कृष्णा सोबती जी का यह उपन्यास हिंदी कथा साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ विभाजन के दुखद और पीड़ादायक स्मृतियों को संजोकर रखता है। "गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान" उपन्यास के सहारे बंटवारे के उस दौर से गुजरा जा सकता है जो हमसे पहले पीढ़ी ने देखा और महसूस किया है और जिसका परिणाम आज तक हमें दिखाई देता रहा है।

‘सिक्का बदल गया’ (कहानी) (Story Sikka Badal Gaya by Krishna Sobti)

      देश विभाजन से संबंधित कृष्णा सोबती की कहानियों में सबसे चर्चित एवं प्रसिद्ध है ‘सिक्का बदल गया’ इसका प्रकाश ‘प्रतीक’ में 1948 में हुआ था, जब अज्ञेय जी इस पत्रिका के संपादक थे। इस कहानी में विभाजन से उत्पन्न दारुण परिस्थितियों के साथ मानवीय संबंधों और मूल्यों में आए विघटन का भी काफी वर्णन है। भारत विभाजन की पीड़ा से वंचित न रह सकी, जिसका इज़हार उन्होंने प्रस्तुत कहानी ‘सिक्का बदल गया’ में किया है। उनकी कहानियां कथ्य और शिल्प दोनों दृष्टि से उनके रचनात्मक वैविध्य को रेखांकित करती है।

डॉ. मुल्ला आदम अली

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