बाल नाटक : बाल विकास में नाटक का महत्व और हिन्दी बाल नाटक का विकास

Dr. Mulla Adam Ali
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Children's Play : Bal Natak

नाटक एक प्रमुख विधा है, जो रचना सिर्फ श्रवण द्वारा ही नहीं जिसे दृश्य रूप दिया जाए उसे नाटक कहते हैं। नाटक में रमणीयता होती है और ये दृश्य श्रव्य दोनों होता है। आज बाल साहित्य के अंतर्गत बाल नाटक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। बाल नाटक क्या है, बाल नाटक के प्रकार, बाल नाटक के गुण, बाल नाटक के विशेषताएं, बाल नाटक का महत्व, क्यों जरूरी है बाल नाटक आदि।

बच्चों के लिए लोकप्रिय हिंदी नाटक

Table of Contents :

• नाटक क्या है : परिभाषा और अर्थ (Meaning and Definition of Drama)
• नाटक के तत्व (Elements of drama)
• नाटक का महत्व  (Importance of the play)
• बाल नाटक (Children's Play)
• बाल विकास में नाटक का महत्व
• हिन्दी बाल नाटक (Hindi Bal Natak)
• बच्चों के लिए लोकप्रिय हिंदी नाटक
• पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी बाल नाटक
• शिक्षाप्रद बाल-नाटक
• हिन्दी के प्रमुख संग्रहीत नाटक
• निष्कर्ष
• FAQ (frequently asked questions)

बाल साहित्य आज प्रचलित विधा है, बाल साहित्य में बाल कहानी, बाल कविता, बाल उपन्यास, जीवनी, यात्रा वृत्तांत, बाल गीत आदि है। बाल साहित्य में बाल नाटक भी शामिल है, बाल नाटक क्या है, बच्चों में बाल नाटक से क्या फायदे है, बाल नाटक विद्यालय में क्यों जरूरी है आदि चर्चा आज इस आर्टिकल में पढ़ेंगे और हिन्दी के प्रमुख बाल नाटक और नाटककार आदि जानकारी भी इस आलेख में पढ़े। 

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बाल नाटक : हिन्दी बाल नाटक (Bal Natak in Hindi)

नाटक क्या है : संस्कृत भाषा से नाटक शब्द की उत्पत्ति हुई नट धातु से, इसका अर्थ है अभिनेता। नाटक का विकास रंगमंच से हुआ है जिस प्रकार कठपुतली को नचाया जाता है धागे की मदद से उसी प्रकार नाट्य जगत में भी क्योंकि रंगमंच नाटक साहित्य का मूल है। नाटक में दृश्य-श्रव्य दोनों रूप होते है, दर्शकों के हृदय को रसानुभूति कराती है। नाटक में माध्यम से मानवीय अनुभवों (संघर्ष, भावनाओं और संवाद और कार्रवाई) का चित्रण शामिल हैं।

नाटक का महत्व : नाटक शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मक अभिव्यक्ति को कला की भूमिका को विभिन्न पहलुओं को समाहित करती है। कुछ संगीत कलाएं, दृश्य कलाएं, नृत्य कलाएं आदि बहुत बहुत कुछ। नाटक में टीम वर्क होता है, नाटक टीम वर्क को बढ़ावा देता है और सहानुभूति, आलोचनात्मक सोच नाटक में होते है यह ऐसा शैक्षिक उपकरण है जिसमें मूल्य होते हैं। आधुनिक नाटक का जनक हेनरिक इबसेन को कहा जाता है और हिन्दी में भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा नाटकों का प्रारंभ माना जाता है। हिन्दी नाटक का विकास क्रम 1. भारतेन्दु युगीन नाटक 1850 से 1900 ई. 2. द्विवेदी युगीन नाटक 1901 से 1920 3. प्रसाद युगीन नाटक 1921 से 1936 4. प्रसादोत्तर युगीन नाटक 1937 से अभी तक।

नाटक के तत्व 

नाटक के प्रमुख तत्व पश्चात्य विद्वानों के मतानुसार इस प्रकार हैं : 1. कथावस्तु 2. पात्र चरित्र-चित्रण 3. संवाद या कथोपकथन 4. भाषा-शैली 5. देशकाल और वातावरण 6. उद्देश्य 7. संकलनत्रय 8. रंगमंचीयता 

नाटक के तत्व भारतीय विद्वानों के अनुसार इस प्रकार है : 1. कथावस्तु 2. नेता (नायक) 3. अभिनय 4. रस 5. वृत्ति

बाल नाटक : बच्चों में सर्वांगीण विकास के लिए बाल नाटक और रंगमंच एक अच्छा माध्यम है, नाटक के जरिए बच्चों का कोमल दिल सृजनात्मक होता है। बाल रंगमंच मुख्य रूप से तीन प्रकार का दिखाई देता है 1. बच्चों का रंगमंच 2. बच्चों के लिए रंगमंच 3. बच्चों के लिए रंगमंच-शिक्षा। बच्चे बचपन से ही कुछ न कुछ अभिनय करते हुए अपनी कल्पना की दुनियां को साकार रूप देने का प्रयास करता रहता है। 

बाल विकास में नाटक का महत्व : बाल नाटक से बच्चों में अनेक प्रकार के कौशल विकास होते हैं 1. भाषा कौशल का विकास 2. कल्पना और रचनात्मकता को प्रोत्साहन 3. सामाजिक और भावनात्मक रूप से विकास 4. समस्या-समाधान कौशल सीखना 5. शारीरिक विकास को बढ़ाना 6. टीम वर्क में बढ़ावा आदि।

हिन्दी बाल नाटक : हिन्दी में बाल नाटक बहुत पहले से लिखी जा रही है जैसे 1. नर्मदाप्रसाद खरे ने नवीन बाल नाटक माला (1955) 2. केशवचंद वर्मा बच्चों की कचहरी (1956) 3. चचा छक्कन के ड्रामे : कुंदसिया जैदी 4. वे सपनों के देश से लौट आये : भानु मेहता 5. प्रतिनिधि बाल एकांकी (1962), चुने हुये एकांकी (1965), सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कृत भो भों खों खों आदि प्रमुख है।

बच्चों के लिए लोकप्रिय हिंदी नाटक : 26 जनवरी और 15 अगस्त के खास मौके पर स्कूल और कॉलेजों में देशभक्ति पर आधारित नाटकों का मंचन किया जाता है, पर्यावरण दिवस जैसे अवसर पर प्रयावरण जागरूकता बढ़ाने के लिए पर्यावरण संरक्षण संबंधी नाटक बच्चों के द्वारा सामूहिक रूप से बच्चों के सामने खेले जाते हैं। महिला सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था, लड़कियों की शिक्षा को आधार बनाकर विद्यालयों में अनेक प्रकार के नाटकों का आयोजन होता रहता है।

पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी बाल नाटक : हर साल जून 5 को पर्यावरण संरक्षण दिवस मनाया जाता है और विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस 28 जुलाई को मनाया जाता है। आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण प्रदूषण है, पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में छात्रों द्वारा नाटक खेले जाते हैं। खासकर छोटे बच्चों के लिए नाटक जो पर्यावरण संरक्षण पर आधारित है वह उनको अच्छी तरह से समझ में आयेगी जिससे बच्चे बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे, पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान देंगे, इसमें नाटक का महत्वपूर्ण योगदान है।

शिक्षाप्रद बाल-नाटक : बच्चों में शिक्षा के महत्व बढ़ाने के लिए नाटक एक सटीक माध्यम है, बालिका शिक्षा, कन्या शिक्षा, महिला सुरक्षा, महिला अधिकार, स्त्री सशक्तिकरण, शिक्षा का महत्व, दहेज प्रथा, भ्रष्टाचार आदि सामाजिक विषयों पर भी विद्यालयों में छात्रों के द्वारा नाटक का आयोजन किया जा सकता है। शिक्षा संबंधी बाल नाटक, सामाजिक विषयों पर बाल नाटक, ट्रैफिक व्यवस्था पर बाल नाटक आदि।

हिन्दी के प्रमुख संग्रहीत नाटक : 1. पानी आ गया - विष्णु प्रभाकर 2. हिरण्यकश्यप मर्डर केस - श्रीकृष्ण 3. नन्हा सिपाही - मनोहर वर्मा 4. हम तो हुए टीचर - ज़ाकिर अली रजनीश 5. आदमी की खोज - भगवती प्रसाद द्विवेदी 6. अपने-अपने छक्के - के.पी. सक्सेना 7. परीक्षा - विनोद रस्तोगी 8. हंगते-गाते चेहरे - उषा सक्सेना 9. सच्चे का बोलबाला - डॉ. बानो सरताज 10. सजा पिताजी को - डॉ. राष्ट्रबंधु 11. कोट और मैडल - साबिर हुसैन 12. पहलवान की खाट - ऋषि‍मोहन श्रीवास्तव 13. परिवर्तन - डॉ. श्रीप्रसाद 14. तस्वीर के रंग - उषा यादव 15. धूर्ताचार्य का औषधालय - अखि‍लेश श्रीवास्तव चमन 16. बाल प्रतिज्ञा - रोहिताश्व अस्थाना 17. सोने का मकान - राधेलाल नवचक्र 18. चूहे के पेट में चूहे कूदे - नागेश पांडेय संजय 19. दवाखाना - श्याम कुमार दास 20. होली के अरसे - इन्दरमन साहू 21. कंचा जीत - प्रेमचंद गुप्त विशाल 22. सूजी का हलवा - डॉ. विद्या श्रीवास्तव 23. अपना हाथ जगन्नाथ - विष्णुकांत पाण्डेय 24. पुरस्कार - हरदर्शन सहगल 25. दांतो की चोरी - नारायण लाल परमार 26. मेरी भी सुनिए - मोहम्मद फहीम 27. हवाई महल - डॉ. परशुराम शुक्ल 28. अरे बाप रे - अंकुश्री 29. बूढ़े शेर का न्याय - रमाशंकर 30. जंगल में कवि सम्मेलन - सूर्य कुमार पाण्डेय। (पुस्तक : तीस बाल नाटक से ज़ाकिर अली रजनीश (सम्पादक)। बाल नाटक जो रबिन्द्रनाथ टैगोर जी द्वारा बच्चों के लिए लिखे गए हैं वह भी प्रसिद्ध है।

निष्कर्ष : बाल विकास के लिए नाटक खेलना आवश्यक है क्योंकि विद्यालयी बाल नाटक बच्चों का चरित्र निर्माण करते हैं। बाल साहित्य पर अधिक जानकारी के लिए डॉ. मुल्ला आदम अली हिंदी भाषा और साहित्यिक ब्लॉग पर सर्च करें। Dr. Mulla Adam Ali Hindi Language and Literature Blog पर Children's Literature से संबंधित Children's Stories, Children's Poems आदि सभी विषयों पर विस्तार पूर्वक लेख मौजूद हैं।

FAQ;

Q. हिंदी थियेटर के भी पितामह किसे कहते हैं? 

Ans. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को हिंदी थियेटर के भी पितामह कहते हैं, उनका जन्म बनारस में 9 सितंबर 1850 को हुआ था। भारतेंदु उनकी उपाधि है, आधुनिक हिंदी साहित्य पितामह के रूप में भारतेंदु जाने जाते हैं।

Q. तेंडुलकर द्वारा रचित नाटक बच्चों के लिए कौनसा है?

Ans. चौपट राजा तथा अन्य बाल नाटक’ तेंडुलकर द्वारा बच्चों के लिए लिखा नाटक है। चिड़ियां का बंगला, चौपट राजा, ताशे वाला तीन कहानियाँ संकलित हैं।

Q. हिन्दी के प्रमुख बाल नाटककार कौन है?

Ans. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, रामनरेश त्रिपाठी, रामेश्वर दयाल दुबे, राजा लक्ष्मण सिंह, भगवन्ननारायण भार्गव, जगन्नाथ प्रसाद 'मिलिंद', डॉ. रामकुमार, हरिकृष्ण प्रेमी, रामचन्द्र रघुनाथ सर्वटे, मास्टर बल्देव प्रसाद, आदि हिंदी के बाल नाटककारों में उल्लेखनीय है।

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