Dr. Shakuntala Kalra's delightful children's poems—Chidiya Aur Chooja, Chiraiya Aur Billaiya, and Hariyal Tota—beautifully capture the innocence, imagination, and joy of childhood. Written in simple, rhythmic language, these poems entertain young readers while gently conveying values of love, care, courage, and togetherness.
3 Best Children's Poems by Dr. Shakuntala Kalra | Chidiya Aur Chooja, Chiraiya Aur Billaiya & Hariyal Tota
डॉ. शकुंतला कालरा की लोकप्रिय रचनाएँ
डॉ. शकुंतला कालरा की ये तीनों बाल कविताएँ—"चिड़िया और चूजा", "चिरैया और बिलैया" तथा "हरियल तोता"—बालमन की सहज जिज्ञासा, पारिवारिक स्नेह, हास्य और मनोरंजन का सुंदर संसार रचती हैं। सरल भाषा, मधुर लय और रोचक कथ्य से सजी ये रचनाएँ बच्चों का भरपूर मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें संवेदनशीलता, आत्मीयता और जीवन-मूल्यों का भी सहज संदेश देती हैं।
ममता और अपनत्व की मधुर बाल कविता
डॉ. शकुंतला कालरा की "चिड़िया और चूजा" एक स्नेहिल बाल कविता है, जिसमें माँ और बच्चे के बीच प्रेम, चिंता और आत्मीय संवाद को अत्यंत सहज एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह कविता बच्चों को पारिवारिक रिश्तों की गर्माहट का सुंदर एहसास कराती है।
चिड़िया और चूजा
चिड़िया बोली लाड लडाती
रूठे चूजे को बहलाती।
चलो दिलाऊँ खेल-खिलौने
जन्म दिवस पर बड़े सलोने।
चीं-चीं कर चूजा बतियाया
मूड देख फरमान सुनाया।
मुझको मां मोबाइल लेना
एक नहीं दो लेकर देना।
दाना चुगने तुम जाती हो
जल्दी वापस कब आती हो?
याद तुम्हारी मुझे सताती
कभी-कभी तो बड़ा रुलाती।
पड़े दिखाई कभी बिलैया
डर जाता हूँ मेरी मैया।
इक मोबाइल संग ले जाना
जिससे अपनी कुशल बताना।
माथा चूमा गले लगाया
छलके आंसू दिल भर आया।
नटखट है पर बड़ा सयाना
बातें करता जैसे नाना।
बुद्धिमानी और फुर्ती का रोचक प्रसंग
"चिरैया और बिलैया" एक मनोरंजक बाल कविता है, जिसमें चिरैया की सूझबूझ और फुर्ती का रोचक चित्रण मिलता है। सरल भाषा और लयात्मक शैली में रची गई यह कविता बच्चों का मनोरंजन करते हुए सतर्क रहने की सीख भी देती है।
चिरैया और बिलैया
छोड़ पेड़ की शीतल छैया।
दाना चुगने आई चिरैया।
देख रही थी एक बिलैया।
मन उछले था ता-ता थैया।
झपटी आकर दैया- दैया।
फिसल गिरा तब एक सिपैया।
आसमान में उड़ी चिरैया।
मुँह ताकती रही बिलैया।
हँसी, अपनापन और कल्पना से भरी बाल कविता
डॉ. शकुंतला कालरा की "हरियल तोता" हास्य, कल्पना और पारिवारिक भावनाओं से भरपूर एक मनमोहक बाल कविता है। इसकी रोचक कथा, संवाद और सहज भाषा बच्चों को आनंदित करते हुए प्रेम, अपनत्व और पारिवारिक सुख का संदेश देती है।
हरियल तोता
हरियल तोता इक अलबेला
गया देखने दिल्ली मेला।
मैना एक साथ में हो ली
पूछा नाम बताया बेला।
चलो साथ हम देखें मेला
भीड़ भड़क्का रेलम रेला।
बिछुड़ न जाना बीच राह में
इतना ध्यान रहे ओ छैला।
घूमे-घामे शापिंग की फिर
पहुँचे जहाँ चाट का ठेला।
खा ली चाट लगी मिर्ची तब
सी-सी करते खाया केला।
घर आते ही मां से बोला
मां यह मेरी वाइफ बेला।
मेले से लाया मैं इसको
खर्चा न कोई पैसा-धेला।
छोड़-छाड़ अपना घर आई
कौसानी का गाँव सुहेला।
हुए अचानक इक दूजे के
अजब खेल कुदरत ने खेला।
चिंता छोड़ो घर की अब माँ
तेरा हरियल नहीं अकेला।
खुशी-खुशी अब तीरथ जाना
सारे घर का छोड़ झमेला।
- डॉ. शकुंतला कालरा
निष्कर्ष; डॉ. शकुंतला कालरा की ये तीनों बाल कविताएँ मनोरंजन और शिक्षा का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती हैं। सहज भाषा, मधुर लय और रोचक प्रसंगों के माध्यम से ये रचनाएँ बच्चों की कल्पनाशक्ति को समृद्ध करती हैं तथा उनमें प्रेम, अपनापन और सकारात्मक जीवन-मूल्यों का सहज विकास करती हैं।
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