परदादा जी का पेड़ | बच्चों को पेड़ लगाने की प्रेरणा देने वाली कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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"Great-Grandfather's Tree" is a heartwarming Hindi children's story by Vinita Rahurikar that highlights the importance of planting trees, preserving nature, and leaving a meaningful legacy for future generations. Through a touching family memory, the story inspires children to care for the environment with love and responsibility.

Great-Grandfather's Tree | Story About Planting Trees

बच्चों के लिए प्रेरक हिंदी बाल कहानी परदादा जी का पेड़

पेड़ केवल फल, फूल और छाया ही नहीं देते, वे पीढ़ियों की यादों, संस्कारों और प्रेम को भी संजोए रखते हैं। प्रसिद्ध बाल साहित्यकार विनीता राहुरीकर की प्रेरक बाल कहानी "परदादा जी का पेड़" बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, दूरदर्शिता और निस्वार्थ सेवा का सुंदर संदेश देती है। आइए, इस भावपूर्ण कहानी के माध्यम से जानें कि आज लगाया गया एक पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए कितना बड़ा उपहार बन सकता है।

बच्चों के लिए प्रेरक हिंदी बाल कहानी

परदादा जी का पेड़

जबसे पिताजी का ट्रांसफर इस शहर में हुआ है अंकित देख रहा था कि पिताजी बहुत खुश हैं। माँ ने अंकित को बताया था कि पिताजी का बचपन इसी शहर में बीता था इसलिए उन्हें इस शहर से विशेष लगाव है क्योंकि उनके बचपन की यादें इस शहर में बसी हुई हैं।

जो सरकारी घर उन्हें रहने को मिला था वो बहुत पुराना लेकिन काफी बड़ा था। घर के आगे-पीछे बड़ा सा बगीचा था जिसमें तरह-तरह के पेड़ लगे थे। अंकित को सामने वाले बगीचे में लगा आम का पेड़ खास तौर पर पसंद था क्योंकि उस पर झूला डला था और इस समय उस पर आम भी लगे थे। अंकित जब मन करता उस पर झूला झूलता और पका आम दिखने पर पिताजी से तुड़वाकर खाता। इस पेड़ के आम बहुत मीठे थे। 

एक रविवार को अंकित सोकर उठा तो दूध पीकर बाहर झूला झूलने चला आया। देखा पिताजी आम के पेड़ को बहुत प्यार से सहला रहे हैं और उनकी आँखों में आँसू हैं। अंकित ने पहले कभी भी पिताजी की आँखों में आँसू नहीं देखे थे। वह घबरा गया।

"पिताजी, क्या हुआ, आप ठीक हो न?" अंकित ने धीरे से पिताजी का हाथ पकड़ कर पूछा।

"हाँ बेटा मैं ठीक हूँ।" पिताजी ने मुस्कुराते हुए कहा।

"आप इस आम के पेड़ को इस तरह प्यार क्यों कर रहे हैं?" अंकित ने झिझकते हुए कहा।

"जानते हो अंकित पैंतीस साल बाद मैं दुबारा इस घर में आया हूँ। यह घर तुम्हारे दादाजी अर्थात मेरे पिताजी को मिला था। तब मैं छोटा था और मेरे दादाजी ने ही यह आम का पेड़ लगाया था जो आज तुम्हे छाँव और आम दे रहा है।" पिताजी ने बताया।

"अरे वाह, आप इसी घर में रहते थे?" अंकित ने आश्चर्य से पूछा।

"हाँ तब यह घर मेरे पिताजी को मिला था। आज इतने सालों बाद मैं दुबारा इसी घर में वापस आ गया हूँ। तुम हमेशा हर घर में मुझे फलों के पेड़ लगाते देख कर कहते थे न कि आप क्यों बेकार पेड़ लगाते हैं जबकि आपको तो कभी इसके फल खाने को ही नहीं मिलेंगे।" पिताजी बोले।

अंकित को याद आया कि पिताजी को जो भी घर मिलता वे उसके बगीचे में और आसपास की खाली जमीन पर भी हमेशा फलों के पेड़ लगाते थे जबकि ट्रांसफर हो जाने के कारण वे कभी भी उन पेड़ों के फल नहीं खा पाए। जब अंकित समझदार हुआ तो हमेशा पिताजी से कहता कि आप बेकार समय और पैसा क्यों व्यर्थ करते रहते हैं फलों के पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने में जबकि इसमें फल आने के पहले ही आपका ट्रांसफर हो जाता है। पिताजी चुपचाप मुस्कुरा देते लेकिन उन्होंने पेड़ लगाना नहीं छोड़ा।

"यदि उस समय वो भी यही सोचते कि दो-चार साल ही तो रहना है यहाँ तो बेकार आम का पेड़ लगाने का क्या फायदा तो आज तुम्हे इसके फल और छाँव नहीं मिलती। न तुम इस पर झूला झूल पाते। बेटा चाहे फलों के हों या छाँव वाले, हमेशा पेड़ लगाते रहना चाहिए। हम भी जो फल खाते हैं उनके पेड़ दूसरों ने लगाए हैं। आज तुम्हे फल नहीं बल्कि आम और छाँव के रूप में परदादा जी का आशीर्वाद मिल रहा है।" पिताजी ने कहा "हम भी दो-चार साल में भले ही चले जाते हैं लेकिन हमारे लगाए पेड़ आज और भविष्य में किसी न किसी अंकित को तो छाँव और फल दे रहे हैं और देते रहेंगे।"

"मैं समझ गया पिताजी। अब मैं भी आपके साथ हर घर में न सिर्फ पेड़ लगाऊंगा वरन उसकी देखभाल भी किया करूंगा ताकि भविष्य में हर अंकित को मीठे फल और ठंडी छाँव मिलती रहे।" अंकित ने कहा तो पिताजी ने प्यार से उसका सर थपथपाया।

"शाबास बेटा"

अंकित ने धीरे से पेड़ को छुआ। अचानक पेड़ की डालियां हिली और पत्ते लहराने लगे। उसे लगा उसके परदादा जी ने उसे आशीर्वाद दिया है।

- विनीता राहुरीकर

निष्कर्ष; "परदादा जी का पेड़" केवल एक बाल कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति, परिवार और भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रेरक संदेश है। यह कहानी सिखाती है कि आज लगाया गया एक पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत बन सकता है।

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