Childhood is filled with joy, imagination, and simple pleasures. These two delightful children's poems by Manoj Jain 'Madhur' —"Aam Dashahari" and "Doraemon"—beautifully capture the sweetness of family moments and the playful spirit of children through simple language and rhythmic verses.
Two Popular Hindi Children's Poems by Manoj Jain 'Madhur' : Aam Dashahari and Doraemon
बचपन की दुनिया छोटे-छोटे सुखों, शरारतों और मधुर अनुभवों से भरी होती है। सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार मनोज जैन के ये दो बाल गीत—"आम दशहरी" और "डोरेमोन"—इसी बाल-मन की सहजता, आनंद और चंचलता को सरल, लयात्मक तथा मनोरंजक शैली में प्रस्तुत करते हैं। पहला गीत परिवार के साथ आम का स्वाद साझा करने की मधुर अनुभूति कराता है, जबकि दूसरा गीत बच्चों की कल्पनाशील और शरारती दुनिया का जीवंत चित्र खींचता है। आशा है कि ये दोनों बाल गीत बाल पाठकों के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों को भी समान रूप से आनंदित करेंगे।
बच्चों के लिए दो सुंदर हिंदी बाल गीत
आम दशहरी
आम दशहरी लाए पापा ।
ऑफिस से घर आए पापा ,
आम दशहरी लाए पापा ।
हल्का रंग हरा है पीला ,
अंदर से है बहुत रसीला।
हमनें पूछा स्वाद बताओ,
दादू बोले है शहदीला।
सब लोगों ने मिलकर खाए ,
सबके मन को भाए पापा।
आम दशहरी लाए पापा ।
Children's Poem on Doraemon
डोरेमोन
पूछ रहे हैं ,
डुग्गू सबसे ,
बोलो बोलो मैं हूँ कौन?
हर हालत में दादा जी का ,
इनको ही मिलता है वोट।
धमा चौकड़ी पूरे घर में ,
कब्जे में कर लिया रिमोट।
बदला करते ,
चैनल दिन भर ,
कर लेते हैं टीवी ऑन।
हाथ उठाकर उछले पहले ,
कोशिश की फिर मुड़ने की।
रही अधूरी आशा इनकी ,
आसमान में उड़ने की।
गिरे धप्प से ,
नीचे आकर ,
बोले मैं हूँ डोरेमोन।
पकड़ पेंसिल दीवारों पर ,
छिपकर चित्र बनाते हैं।
जाने क्या-क्या खुरच खुरच कर ,
चुपके से खा जाते हैं?
डाँट पड़े जब ,
मम्मी जी की ,
सकुचाकर कर हो जाते मौन।
- मनोज जैन 'मधुर'
निष्कर्ष; "आम दशहरी" और "डोरेमोन" दोनों बाल गीत मनोरंजन के साथ-साथ पारिवारिक स्नेह, बाल-सुलभ जिज्ञासा और कल्पनाशीलता का सुंदर संदेश देते हैं। सरल भाषा, मधुर लय और सहज भावों से सजी ये रचनाएँ बच्चों के मन को आनंदित करती हैं तथा हिंदी बाल साहित्य को समृद्ध बनाती हैं।
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