हमारी संस्कृति और आस्था का प्रतीक शंख : शिवचरण चौहान

Dr. Mulla Adam Ali
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The conch (Shankha) holds a sacred place in Hindu culture and traditions, symbolizing purity, prosperity, and divine energy. This article explores its religious significance, mythological background, traditional beliefs, and commonly shared scientific perspectives, highlighting its enduring role in Indian spiritual heritage.

Significance of the Shankha in Hinduism: Religious, Mythological and Scientific Perspectives

हमारी संस्कृति और आस्था का प्रतीक शंख

हिंदू धर्म में शंख का महत्व: पूजा, परंपरा और वैज्ञानिक तथ्य

भारतीय संस्कृति में शंख केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि आस्था, आध्यात्मिकता और शुभता का द्योतक है। प्रस्तुत आलेख में वरिष्ठ लेखक शिवचरण चौहान ने शंख से जुड़े धार्मिक विश्वासों, पौराणिक प्रसंगों, सांस्कृतिक परंपराओं तथा लोकमान्यताओं का सरल और रोचक विवेचन किया है। यह लेख पाठकों को शंख के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराते हुए हमारी समृद्ध वैदिक परंपरा की एक महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करता है।

शंख का धार्मिक महत्व: हिंदू धर्म में शंख का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य

  • वैज्ञानिक भी मानते हैं शंख ध्वनि से कीटाणुओं का नाश होता है।
  • हिंदू धार्मिक कार्यों में पूजा और आरती के अवसर पर शंख ध्वनि की जाती है। 
  • रात में शंख बजाना वर्जित है।
  • जिस घर में दक्षिणावर्त शंख होता है उस घर में आरोग्य धनधान्य और सुख शांति मौजूद रहती है
  • भगवान शिव की पूजा में शंख बजाना मना तो बद्रीनाथ धाम में शंख ध्वनि वर्जित है!

शंख, को हिंदू धर्म में बहुत पवित्र और धन-धान्य आरोग्य देने वाला कहा गया है। किसी पूजा आरती हवन यज्ञ की शुरुआत शंख ध्वनि से की जाती है और समापन भी शंख ध्वनि से किया जाता है।

भगवान शिव ने शंख चूड राक्षस का वध किया था। इस कारण भगवान शिव की पूजा अर्चना में शंख का प्रवेश वर्जित है। शंख के जल से शिव का रुद्राभिषेक भी वर्जित है। 

समुद्र मंथन में 18 रत्नों में 8 वां रत्न शंख निकला था। और समुद्र मंथन से ही विष्णु प्रिया लक्ष्मी जी निकली थी इसीलिए शंख को लक्ष्मी जी का भाई कहां गया है। भगवान विष्णु को शंख प्यारा है इसीलिए उनकी पूजा में शंख बजाया जाता है। भगवान अपने दाहिने हाथ में शंख और चक्र धारण करते हैं। उनके चार हथियारों में शंख चक्र गदा पद्म हैं। शंख ध्वनि शत्रुओं का नाश करती है।

शंख मोलास्क वर्ग का पानी का जीव है। संघ सीपी घोंघे और कौड़ियां मोलस्क वर्ग के जी जीव हैं । यह जीव समुद्र और कैलाश मानसरोवर तथा कुछ है पर्वतीय जलाशयों में पाए जाते हैं। जबलपुर के पास एक पहाड़ी में भी शंख पाए जाते हैं। यह जीव कठोर खोल में रहता है जो पत्थर से भी ज्यादा मजबूत होता है। सीप घोंघा, कौड़ी और शंख का जीव जब मर जाता है तो इंसान इनको इकट्ठा कर लेता है। कई बार तो शंख के जीव को मारकर शंख निकाल लिया जाता। 

शंख के मुख्य रूप से तीन रूप पाए जाते हैं। दक्षिण मुखी यानी दक्षिणावर्त शंख, मध्यम वर्ग शंख यानी गणेश शंख और वामावर्त शंख। सबसे बढ़िया शंख दक्षिणावर्त माना जाता है। भगवान कृष्ण के पास जो पांचजन्य शंख था वह दक्षिणावर्ती शंख था। पांचजन्य शंख का उपयोग भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में किया था। अर्जुन के शंख का नाम देवदत्त था। युधिष्ठिर के शंख का नाम अनंत विजय और भीम के शंख का नाम पौंद्र नकुल के शंख का नाम सुभाष और सहदेव के संघ का नाम पुष्पक था। भीष्म पितामह के शंख का नाम गंग नाद जो उन्हें मां गंगा से मिला था।

वैसे तो संघ के दो दर्जन प्रकार मिलते हैं। हीरा शंख ,मोती शंख आदि।

शंख को पूजा घर में लाल या पीले साफ कपड़े में लपेट कर रखना चाहिए। शंख बजाने और रखने के पूर्व उसे साफ पानी से धो लेना चाहिए। पूजा आरंभ करने से पूर्व और पूजा के समापन पर शंख ध्वनि की जाती है। जिन घरों में रोज पूजा होती है उन घरों में शंख की देव प्रतिमाओं के साथ रोज पूजा की जानी चाहिए धूप दीप नैवेद्य से शंख की पूजा करनी चाहिए। पुराणों में ऐसा कहा गया है किस शंख जिस घर में रहता है उस घर में आरोग्य निवास करता है लक्ष्मी जी वहां स्थाई रूप से रहती हैं और कल ह झगड़े याद नहीं होते।

पुराणों में कहा गया है स्त्रियों को शंका नहीं बजाना चाहिए। वैज्ञानिक भी मानते हैं किस शंख बजाने से फेफड़ों मुख्य में और हृदय में जोर पड़ता है इस कारण महिलाएं शंख ना हो जाए क्योंकि इन अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। पुरुष यदि शंख बजाते हैं तो उनके स्नायु मजबूत होते हैं मुख् में चमक आती है हृदय मजबूत होता है और फेफड़े बीमार नहीं होते। 50 बार योगासन करने से सुबह शाम शंख बजाने के बराबर है। रात में शंख बजाने से वर्जित किया गया है क्योंकि रात में देवता सोते हैं और संगठन से जाग जाते हैं। शंख भगवान विष्णु को फ्री है इसलिए शंख बजाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। इसलिए शंख को हिंदू वैदिक ग्रंथों में बहुत पवित्र पावन और सौभाग्य वर्धक माना गया है। टूटा फूटा शंख न तो घर में रखना चाहिए ना बजाना चाहिए। 

भगवान बद्रीनाथ के मंदिर में शंख बजाना वर्जित है। पुराणों में कथा आती है कि जब लक्ष्मी जी तुलसी के रूप में भगवान विष्णु की पूजा कर रही थी तो उसी समय शंखचूड़ नामक राक्षस का बध हुआ था। लक्ष्मी जी की तपस्या में यानी तुलसी की तपस्या में कहीं बाधा ना हो जाए इसलिए बद्रीनाथ मंदिर में शंख बजाना प्रतिबंधित है। बहुत तेज बादल गरजने आसमान से बिजली गिरने की संभावना होने पर शंख ध्वनि की जाती है इससे आकाशीय बिजली का खतरा समाप्त हो जाता है।

शंख और कौड़ी हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माने गए हैं। कौड़ी तो पहले राजमुद्रा भी थी। बाजार में असली और नकली संग कभी मिलते हैं जिनकी पहचान बहुत जरूरी है। नकली शंख आग में दिखाने पर लाल हो जाता है।

वैदिक ग्रंथों पुराण ग्रंथ और पूजा पद्धति के अध्ययन के बाद लिखित लेख।

- शिवचरण चौहान

निष्कर्ष; शंख भारतीय संस्कृति, आस्था और वैदिक परंपरा का पवित्र प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं में इसका विशेष महत्व रहा है। श्रद्धा, शुभता और सकारात्मकता का संदेश देने वाला शंख हमारी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का अमूल्य धरोहर है।

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