Celebrate the spirit of patriotism with four inspiring children's poems by Dr. Shakuntala Kalra. Through simple language and engaging rhythm, these poems introduce young readers to courage, freedom, national pride, and the sacrifices of India's great freedom fighters.
Four Inspiring Patriotic Poems for Children by Dr. Shakuntala Kalra | Independence Day Special
डॉ. शकुंतला कालरा की देशभक्ति बाल कविताएँ
देशभक्ति, स्वतंत्रता और राष्ट्रप्रेम जैसे जीवन-मूल्यों को बालमन तक सरल, रोचक और प्रेरक ढंग से पहुँचाना बाल साहित्य का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार डॉ. शकुंतला कालरा की प्रस्तुत चार बाल कविताएँ—"देश के वीर सिपाही हम", "पन्द्रह अगस्त खुशी मनाओ", "शहीद भगतसिंह" और "आज़ादी की कहानी"—बच्चों के मन में देश के प्रति प्रेम, वीरों के बलिदान के प्रति सम्मान तथा राष्ट्रीय एकता और जिम्मेदारी की भावना का सहज संचार करती हैं। सरल भाषा, मधुर लय और प्रेरक भावों से युक्त ये कविताएँ स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ और उसके महत्व को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाती हैं।
डॉ. शकुंतला कालरा की प्रेरक देशभक्ति बाल कविता
"देश के वीर सिपाही हम" बच्चों में साहस, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना जगाने वाली प्रेरक बाल कविता है। सरल भाषा और ओजपूर्ण भावों से सजी यह कविता देश के प्रति समर्पण का सुंदर संदेश देती है।
देश के वीर सिपाही हम
हम हिम्मत से लड़ें,
देश के वीर सिपाही हम।
जो किस्मत का रोना रोते,
वे कायर कहलाते।
हम तो हैं श्रम जीवी इससे,
अपनी मंजिल पाते।
काम करें दिन रात,
हमारे रुकते नहीं कदम।
देश के वीर सिपाही हम।
हमें भरोसा अपने पर हम,
हैं ऐसे दीवाने।
आंधी बारिश तूफानों में,
चलते सीना ताने।
दुश्मन है चालाक,
मगर हम नहीं किसी से कम,
देश के वीर सिपाही हम।
स्वतंत्रता दिवस पर डॉ. शकुंतला कालरा की बाल कविता
"पन्द्रह अगस्त खुशी मनाओ" स्वतंत्रता दिवस के उत्साह, तिरंगे के सम्मान और आज़ादी की खुशियों को बच्चों की दुनिया से जोड़ने वाली मनमोहक बाल कविता है। यह कविता बच्चों में राष्ट्रप्रेम और उत्सव का भाव जगाती है।
पन्द्रह अगस्त खुशी मनाओ
है पन्द्रह अगस्त सब आओ।
मस्ती करो पतंग उड़ाओ।
ले आ मांजा मुन्नु बेटा।
तू चरखी भर चुन्नु बेटा।
ले पतंग ले पुन्नु बेटा।
बाँधो कन्नी कुन्नु बेटा।
जरा उछालो छुन्नु बेटा।
अरे संभालो पुन्नु बेटा।
देखो कैसे गोता खाए।
अरे हवा से न फट जाए।
ढीली छोड़ो इसे बढ़ाओ।
ऊँचे से ऊँचा पहुँचाओ।
बापू ने थी पतंग उड़ाई।
नाम ‘स्वराज’ दिया था भाई।
अंग्रेजो की कटी पतंग।
जिस पर था अंग्रेजी रंग।
ऐसा था बापू का ढंग।
जिसे देखकर सब थे दंग।
फर-फर-फर आजादी आई
नाचा देश थिरक कर भाई।
उड़ा तिरंगा उड़ी पतंग
यह था आजादी का रंग
नाचो-कूदो मौज मनाओ
मस्ती करो पतंग उड़ाओ।
डॉ. शकुंतला कालरा की प्रेरणादायक देशभक्ति कविता
"शहीद भगतसिंह" महान क्रांतिकारी भगत सिंह के साहस, त्याग और देशप्रेम का प्रेरक चित्र प्रस्तुत करती है। यह बाल कविता बच्चों को स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से परिचित कर उनके प्रति सम्मान का भाव विकसित करती है।
शहीद भगतसिंह
जलियाँ वाला बाग गया वह,
चाचा ने दीवार दिखाई।
जो चाचा ने कही कहानी,
तो उसकी आँखे भर आईं।
भगत सिंह के मन में उस पल,
आजादी का सपना आया।
नमन किया पहले धरती को,
उसकी रज से तिलक लगाया।
बदला लूँगा भगतसिंह ने,
तब अपने मन में थी ठानी।
अंग्रेजों से खूब लड़ूँगा,
देनी पड़े भले कुर्बानी।
हुए शहीद भगतसिंह हँसकर,
व्यर्थ गई न यह कुर्बानी।
आजादी पाने को तत्पर,
आए नए-नए सेनानी।
डॉ. शकुंतला कालरा की प्रेरक बाल कविता
"आज़ादी की कहानी" भारत की स्वतंत्रता, वीरों के बलिदान और राष्ट्रीय एकता का प्रेरक संदेश देने वाली प्रभावशाली बाल कविता है। यह बच्चों को आज़ादी के महत्व और उसके संरक्षण की प्रेरणा देती है।
आज़ादी की कहानी
है अनमोल बड़ी आजादी,
इसकी रक्षा मिलजुल करना।
तन-मन-धन सब कुछ अर्पित कर,
इस की खातिर जीना-मरना।
गाँधी, वीर, सुभाष, तिलक ने,
सोया स्वाभिमान जगाया।
करनी होगी दूर गुलामी,
सारे भारत को समझाया।
बलिदानों की अमिट कथा है,
आजादी की सुनो कहानी।
इसकी खातिर नवयुवकों ने,
दे डाली अपनी कुर्बानी।
राज गुरु, सुखदेव, भगत सिंह,
से आजादी के दीवाने।
हँसते-हँसते कूद पड़े थे,
खुद ही फाँसी पर टंग जाने।
इन जैसे वीरों के आगे,
श्रद्धा से हम शीश झुकाएं।
आज़ादी के ये नायक हैं,
देखो इनको भूल न जाएँ।
- डॉ. शकुंतला कालरा
निष्कर्ष; डॉ. शकुंतला कालरा की ये चारों बाल कविताएँ बच्चों में राष्ट्रप्रेम, साहस, त्याग और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान का भाव जगाती हैं। सरल भाषा और प्रेरक संदेश से भरपूर ये रचनाएँ बाल पाठकों को अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा देती हैं तथा आज़ादी के महत्व को हृदय से समझने का अवसर प्रदान करती हैं।
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