Vinita Rahurikar’s “Bhutte Wali Barsatein” beautifully captures the charm of the rainy season through simple, lively, and rhythmic words. From roaring clouds and puddles to hot roasted corn on a rainy evening, the poem celebrates the little joys that make monsoon so special.
Bhutte Wali Barsatein Poem by Vinita Rahurikar | Beautiful Hindi Rain Poem
बारिश का मौसम अपने साथ प्रकृति के बदलते रंग ही नहीं, बल्कि बचपन और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी खुशियाँ भी लेकर आता है। विनीता राहुरीकर की कविता ‘भुट्टे वाली बरसातें...’ में बारिश का यही जीवंत और आत्मीय रूप दिखाई देता है। झमाझम बरसात, बादलों की गड़गड़ाहट, मेंढकों की टर्र-टर्र और भीगी सड़क पर सिगड़ी में सिकते भुट्टों की खुशबू—कवयित्री ने सहज, लयात्मक और चित्रात्मक शब्दों में बरसात की मनभावन तस्वीर उकेरी है। आइए, पढ़ते हैं प्रकृति और स्वाद से जुड़ी यह सुंदर कविता।
विनीता राहुरीकर की बारिश पर सुंदर कविता
भुट्टे वाली बरसातें...
नदी-नाले, ताल-तलैया
भर गये सारे पोखर
गड्ढे पी गये ढेर सा पानी
आयीं झमाझम वाली बरसातें...
मुँह छुपाया सूरज ने
चन्दा हो गया गायब
तारे बैठे हो उदास
आयीं बादलों वाली बरसातें...
कुहू-कुहू का राग नहीं
न भँवरे की गुनगुन
ढोल बज रहे आसमान में
आयीं टर-टर वाली बरसातें...
नींबू पानी-कोल्डड्रिंक
भूले, चाय बनाई
भीगी सड़क पर जलती सिगड़ी
आयीं भुट्टे वाली बरसातें...
- विनीता राहुरीकर
निष्कर्ष; विनीता राहुरीकर की ‘भुट्टे वाली बरसातें...’ कविता बारिश के प्राकृतिक सौंदर्य और उससे जुड़ी छोटी-छोटी खुशियों को बेहद सहजता से सामने लाती है। झमाझम बारिश, बादलों की गड़गड़ाहट और गरमागरम भुट्टे कविता को आत्मीय और आनंदमय बना देते हैं।
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