Rain brings joy, imagination, and endless fun to every child. In these three delightful poems—"Barish Aayi," "Chhata," and "Barish Aur Bachche"—renowned children's writer Vinita Rahurikar beautifully captures the magic of the rainy season, childhood innocence, and the excitement of playing in the rain through simple, rhythmic, and engaging verses.
3 Beautiful Hindi Rain Poems for Children by Vinita Rahurikar
बच्चों के लिए वर्षा ऋतु की 3 सुंदर कविताएँ
बारिश बच्चों के लिए केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि आनंद, कल्पना और प्रकृति से जुड़ने का उत्सव है। सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार विनीता राहुरीकर की प्रस्तुत तीन बाल कविताएँ—"बारिश आयी", "छाता" और "बारिश और बच्चे"—वर्षा ऋतु की मस्ती, बालमन की चंचलता और सहज संवेदनाओं को अत्यंत सरल, मधुर एवं चित्रात्मक भाषा में प्रस्तुत करती हैं। ये कविताएँ बच्चों को प्रकृति के निकट ले जाते हुए उनके मन में उल्लास, मित्रता और जीवन के छोटे-छोटे सुखों का सुंदर एहसास कराती हैं।
बच्चों के लिए वर्षा ऋतु पर सुंदर हिंदी बाल कविता
1. बारिश आयी...
बारिश आयी-बारिश आयी
सँग बादलों के घड़े लायी
धरती पर पानी बरसा कर
सभी जीवों की प्यास बुझाई।।
भुट्टे राजा बजा कर बाजा
अँगीठी पर बैठ कर आए
नमक-नींबू के चटखारों से
सब के मन पर वो छाए।।
जामुन भला क्यों पीछे रहते
नमक-मिर्च में लिपट के आए
खट्टे-मीठे अपने स्वाद से
सबका मन वो ललचाए।।
बारीश की बूँदों में भीगते
मेंढक फुदक-फुदक टर्राते
बच्चे ताली बजा-बजा कर
आँगन भर में नाव चलाते।।
गड्ढों में छपाक कूदते
चुल्लू भर आनंद में डूबते
कीचड़, मिट्टी में लथपथ हो
बच्चे बारिश के मजे लूटते।।
बारिश और दोस्ती पर बच्चों की मनमोहक हिंदी कविता
2. छाता...
संदूक से बाहर निकले छाते
आँख मिचमिचाते देखते जाते
रँग-बिरंगी अपने तन को
खोल ताने वो मुस्काते।।
फूलों वाला है चुन्नू का
सिंड्रेला वाला चेरी का
उर्वी लेकर आई अपना
छाता हैरी पॉटर का।।
सौम्या का है छाता निराला
छनछन बजता घुँघरू वाला
धूप से तो खूब बचाता
बारिश में पर काम न आया।।
भीगा छाता, भीगी सौम्या
दोनों ठंड में कम्पकम्पाए
उर्वी, चुन्नू, चेरी ने तब
अपने छाते आगे बढ़ाए।।
थोड़ा भीगती, थोड़ा बचती
चारों बहने घर को लौटी
मस्ती आज खूब की उन्होंने
माँ ने अब गरम चाय पिलाई।।
वर्षा ऋतु की मस्ती पर प्रेरक हिंदी बाल कविता
3. बारिश और बच्चे...
इतना आज बरसा पानी
कितनी खुश है बारिश रानी
ताल-तलैया सब भर गए
बच्चे करने लगे मनमानी।।
गड्ढों में छपाक कूदते
चुल्लू भर, फुहार उड़ाते
कीचड़-मिट्टी में लथपथ हो
बच्चे बारिश के मजे लूटते।।
भीगे कपड़े, भीगे जूते
आज नहीं है रोक कोई
छत पर स्विमिंग पूल बना
छपछप करते उसी में तैरते।।
नहीं खिलौने, नहीं मोबाइल
जीवन का आनंद यही है
सब मिल भीगे बारिश में
जीवन की सौगात यही है।।
बहती धारा में नाव चलाते
हाथों को ही चप्पू बनाते
कागज की नाव पर बैठ
खुद ही कोलम्बस बन जाते।।
फुदकु मेंढक, बीरबहूटी
अपनी सबसे यारी-दोस्ती
कभी खत्म न हो ये मस्ती
बूँदों में स्वप्न सँसार बसाते।।
- विनीता राहुरीकर
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निष्कर्ष; विनीता राहुरीकर की ये तीनों बाल कविताएँ वर्षा ऋतु के सौंदर्य, बालसुलभ आनंद और प्रकृति के प्रति अपनत्व को सहज एवं रोचक ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। सरल भाषा, लयात्मकता और जीवंत चित्रों से भरपूर ये रचनाएँ बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी अपने बचपन की मधुर स्मृतियों से जोड़ देती हैं।


