“Ganeshotsav” by Madhu Maheshwari beautifully captures the joy, devotion, and festive spirit of Ganesh Chaturthi. With simple language and vivid imagery, the poem introduces children to the traditions and celebrations associated with this beloved festival.
Ganeshotsav Poem | Beautiful Poem on Ganesh Chaturthi | Madhu Maheshwari
मधु माहेश्वरी की कविता ‘गणेशोत्सव’ में गणेश चतुर्थी के उल्लास, सामूहिक सहभागिता और भक्ति-भाव का सुंदर चित्रण हुआ है। कविता में मंडप सजाने, झाँकी बनाने, आरती करने और गणपति को मोदक-मेवा का भोग लगाने के प्रसंगों के माध्यम से बच्चों के उत्साह और हमारी सांस्कृतिक परंपराओं की जीवंत झलक मिलती है। सरल और सहज भाषा में रची यह कविता बच्चों को गणेशोत्सव की आनंदमयी अनुभूति कराती है।
गणेश चतुर्थी पर सुंदर कवित
गणेशोत्सव
पर्व गणेश चतुर्थी आया,
सुन्दर योजना हम बनाऍं।
तपन चौक के ऑंगन भाई,
सुन्दर एक मण्डप सजाऍं।।
पास सड़क तोरणद्वार बना,
गुब्बारे उसपर लटकाऍं।।
चौकी लगा आसन बिछाकर,
मुर्ति गणपति की हम धराऍं।।
सभी बड़े-बुजर्गों के संग,
मिलकर गणेशोत्सव मनाऍं।
नित्य नूतन झांकी सजा कर,
नाचे -गाऍं धूम मचाऍं।।
रोज शाम को आरती करें,
धूप दीप नैवेद्य चढाऍं।
मोदक-मेवा पान सुपारी,
प्रेम सहित हम भोग लगाऍं।।
- मधु माहेश्वरी, राजस्थान
अंततः, ‘गणेशोत्सव’ कविता बच्चों में उत्सव, भक्ति, सहयोग और भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम की भावना जगाती है। सरल शब्दों में कही गई यह कविता गणेशोत्सव की खुशियों को सहजता से अभिव्यक्त करती है।
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