घमंडी पहाड़ – घमंड का परिणाम बताने वाली शिक्षाप्रद हिंदी बाल कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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"The Arrogant Mountain" is a delightful Hindi moral story by Omprakash Kshatriya 'Prakash'. Through an engaging tale of nature, the story teaches children that pride leads to downfall, while humility, cooperation, and respect for every living being are the true foundations of strength and happiness.

The Arrogant Mountain – Moral Story for Kids by Omprakash Kshatriya 'Prakash'

पर्यावरण और नैतिक शिक्षा पर आधारित बाल कहानी घमंडी पहाड़

प्रकृति हमें केवल सौंदर्य ही नहीं, बल्कि विनम्रता, सहयोग और संतुलन का भी संदेश देती है। प्रसिद्ध बाल साहित्यकार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ की प्रेरक बाल कहानी "घमंडी पहाड़" बच्चों को सरल और रोचक शैली में यह सीख देती है कि घमंड अंततः विनाश का कारण बनता है, जबकि प्रकृति के प्रत्येक जीव और पेड़-पौधे का अपना महत्वपूर्ण योगदान होता है। आइए, पढ़ते हैं यह मनोरंजक और शिक्षाप्रद बाल कहानी।

पर्यावरण और नैतिक शिक्षा पर आधारित बाल कहानी

घमंडी पहाड़

नदी के किनारे तीन पहाड़ थे। जिनमें एक पहाड़ सबसे बड़ा और खूबसूरत था। उसे देखकर सबसे छोटे पहाड़ ने कहा, “भैया! आप कितने खूबसूरत हो।”

“जी,” कहकर उसे बड़े पहाड़ ने अपने आप को देखा। वह सभी पहाड़ों से बहुत बड़ा और खूबसूरत था। उसे पर जगह-जगह खूबसूरत पेड़पौधे और फलफूल लगे हुए थे। हरियाली घाटी के बीच उगे हुए फूल बहुत खूबसूरत दिख रहे थे। साथ ही उसे पहाड़ के चारों ओर घूमते हुए नदी बह रही थी। इससे उसकी खूबसूरती और ज्यादा निखर रही थी।

अपनी खूबसूरती को देखकर उस पहाड़ को अपने आप पर घमंड हो गया। वह तूनक कर बोला, “मैं हूं ही इतना खूबसूरत! इसलिए मेरी तारीफ करना तो बनता है।” कहकर वह घमंड से ऐंठने लगा।

मझले पहाड़ ने जब उसकी प्राकृतिक सुंदरता को निहार कर कहा, “वाकई भाई! आप बहुत ही खूबसूरत हो!”

“धन्यवाद मझले!” कहकर सबसे बड़े पहाड़ ने जोरदार अंगड़ाई ली। इससे पहाड़ पर स्थित बड़े-बड़े पेड़ों पर बने हुए घोंसले हिलने लगे।

इस पर एक घोंसले में बैठी हुई चील ने कहा, “क्या करते हो भाई? आपके इस तरह हिलने से मेंरे घोंसला नीचे गिर जाएग। जिससे उसमें रखे हुए अंडे फूट जायेंगे।” उसने बड़ी विनम्रता के साथ अपनी बात रखी।

मगर बड़े पहाड़ को अपनी खूबसूरती और विशालता पर घमंड हो गया था इसलिए उसने अकड़कर कर कहा, “ अरे पिद्दे से जीव,ल! क्या मैं तेरा ध्यान रखते हुए अंगड़ाई भी न लूं?” जोर से अंगड़ाई लेते हुए पहाड़ ने कहा।

बड़े पहाड़ के ऐसा करते ही चील के घोंसले से अंडे नीचे गिरे। फुटकर चूर-चूर हो गए। यह देखकर चील को रोना आ गया। जिसे देखकर बड़ा पहाड़ हंसने लगा।

दुखी होकर चील ने उसे पहाड़ को छोड़ दिया। फिर मझले पहाड़ पर जाकर अपना घोंसला बना लिया। इससे बड़े पहाड़ का घमंड ओर बढ़ गया। वह आए दिन छोटे-मोटे पेड़पौधे और जीवजंतुओं को दुत्कारने लगा।

एक दिन उसने चींटी को अपना बिल और दीमक को अपनी बांबी बनाते हुए देखा तो कहा, “अरे पिद्दी से जीव, क्यों मेरी छाती पर मूँग दल रहे हो। इस हरकत से मुझे कांटकांट कर खोखला कर रहे हो?”

इस पर दीमक ने जवाब दिया, “अरे खूबसूरत पहाड़ भाई, हम तो अपना बहु मंजिला घर बना कर आपकी खूबसूरती बढ़ा रहे हैं।”

“मेरी खूबसूरती बढ़ा रहे हो? या मेरी छाती पर मूंग दल कर मुझ में छेद कर रहे हो?” कह कर पहाड़ ने अपने आप को एक झटका दिया। इससे दीमक का बहु मंजिला घर गिरकर नष्ट हो गया। वह अभी ताजाताजा ही बना था इसलिए सुख नहीं पाया था।

दीमक ने वहां रहना ठीक नहीं समझा। वह अपने साथियों के साथ धीरे-धीरे मझले और छोटे पहाड़ की ओर चली गई।इसी के साथ बड़े-बड़े पेड़पौधे भी गिर कर नष्ट हो गए थे।

इस तरह बड़े पहाड़ को धीरे-धीरे सभी ने छोड़ दिया। वह अपने घमंड में इतना चूर हो गया कि उसने बादलों को भी अपने ऊपर बरसाने से मना कर दिया। वे बेकार में ही उसकी ऊपर बरस कर उसकी मिट्टी को खोखला कर रहे हैं। इससे उसकी खूबसूरती बिगड़ जाती है। इस वजह से बादल ने भी उसके ऊपर बरसना छोड़ दिया।

इस तरह धीरे-धीरे पहाड़ अकेला हो गया। पहाड़ पर पेड़पौधे नहीं होने, पशुपक्षियों के बसेरा नहीं करने से और उसके आसपास नदी के तेज बहने के कारण उसकी जड़े खोखली हो गई। इस तरह एक दिन वह नदी के तेज बहाव के साथ बहने लगा। यह देखकर वह घबरा गया।

“अरे! यह क्या हो गया? मैं तो नदी के साथ बहने लगा हूं,” कहने की साथ बड़े पहाड़ के आंसू निकल गए। वह समझ गया कि अब वह पानी में बहकर नष्ट हो जाएगा।

इस पर सबसे छोटे पहाड़ ने कहा, “लगता है भैया, अब आप नष्ट होने जा रहे हैं।”

“हां छोटे। मगर ऐसा कैसे हो गया?” उसने रोते हुए पूछा।

“मुझे क्या पता? यह तो तेज बहती हुई नदी से पूछो?” सबसे छोटे पहाड़ ने जवाब दिया तो बड़े पहाड़ ने नदी से पूछा, “नदी बहन! यह सब क्या हो रहा है?”

इस पर नदी ने तेज बहते हुए कहा, “खूबसूरत पहाड़ भाई! अब तुम नीचे से खोखले हो गए हो। इसलिए मेरे साथ बहे जा रहे हो।”

“मगर यह सब कैसे हुआ?” बड़े पहाड़ ने पछताते हुए पूछा।

“आपके घमंड की वजह से,” नदी ने उसको छोटेछोटे टुकड़े में बिखरते हुए तेज बहाव के साथ आगे ले जाते हुए कहा तो पहाड़ ने आंसू बहाते हुए पूछा, “मगर ऐसा क्यों हुआ नदी बहन?”

“क्योंकि पहाड़ भाई, किसी भी जमीन के कटाव को रोकने में पेड़पौधे की जड़े बहुत काम आती है। वे पहाड़, जमीन, धरती, उसकी मिटटी आदि को मजबूती से पकड़े रखती है। इस कारण जिस धरती और पहाड़ पर पेड़पौधे, जीवजंतु आदि ज्यादा होते हैं वे पहाड़ बहुत ज्यादा मजबूत होते हैं। मगर आप जैसे खूबसूरत पहाड़ पर एक भी बड़ेछोटे जीवजंतु, पेड़पौधे, घासफूस आदि नहीं रहे हैं। इस वजह से आप खोखले हो गए हो।”

यह सुनकर खूबसूरत पहाड़ घबराने लगा। क्योंकि उसके छोटे-छोटे टुकड़े होकर पानी में बहने लगे थे। वह पूरी तरह नष्ट होने के कगार पर था। मगर अब क्या हो सकता था। वह बड़ा सा पहाड़ सबसे छोटे पहाड़ की तरह पानी में बह रहा था।

यह देखकर उसके आंसू निकल गए। तब उसने जोर से बड़बड़ाते हुए कहा, “किसी को भी अपनी खूबसूरती पर इतना घमंड नहीं करना चाहिए कि वह अपना अस्तित्व ही भूल जाए। वह दूसरों की वजह और सहयोग से ही इस दुनिया में जीवित है।”

यह सुनकर नदी ने कहा, “खूबसूरत पहाड़ भाई! अगर यही बात आप पहले समझ गए होते तो आज आपका यह हश्र नहीं होता।”

मगर अब क्या हो सकता था? पहाड़ अपने घमंड की वजह से नष्ट होकर नदी के साथ बह रहा था। इसीलिए कहते हैं कि किसी भी जीवजंतु, पेड़पौधे और मनुष्य को घमंड नहीं करना चाहिए।

- ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

निष्कर्ष; "घमंडी पहाड़" केवल एक मनोरंजक बाल कहानी नहीं, बल्कि जीवन का महत्वपूर्ण संदेश भी देती है। यह कहानी सिखाती है कि घमंड मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है और प्रकृति में हर जीव तथा पेड़-पौधे का अपना महत्व है। विनम्रता, सहयोग और प्रकृति के प्रति सम्मान ही सच्ची महानता की पहचान है।

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