“Adbhut Leela Uski Dekho” is a beautiful Hindi poem for children by Dr. Shakuntala Kalra, from her poetry collection Baalman Ki Indradhanushi Kavitayein. Through a lively conversation between Chintu and his mother, the poem explores the wonders of nature, the creation of the universe, and the mysterious presence of the Creator.
Adbhut Leela Uski Dekho Hindi Poem for Children by Dr. Shakuntala Kalra
बाल कविता संग्रह बालमन की इन्द्रधनुषी कविताएँ से डॉ. शकुंतला कालरा की बाल कविता ‘अद्भुत लीला उसकी देखो’ में सृष्टि की रचना और प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य को बालसुलभ जिज्ञासा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। चिंटू और उसकी मम्मी के संवाद के जरिए कवयित्री ने ईश्वर की सृजनशीलता तथा सर्वव्यापकता को सरल, रोचक और सहज भाषा में अभिव्यक्त किया है। कविता बच्चों में प्रकृति के प्रति विस्मय, जिज्ञासा और आध्यात्मिक भाव जगाती है। आइए, पढ़ते हैं यह सुंदर बाल कविता।
डॉ. शकुंतला कालरा की बाल कविता
अद्भुत लीला उसकी देखो
चिंटू ने मम्मी से पूछा -
किसने यह संसार बनाया?
अद्भुत सृष्टि रची है सारी,
मुझे बनाया, तुझे बनाया।
चिंटू, वह तो कुशल खिलाड़ी,
खेल खेलता न्यारे-न्यारे ।
सुंदर-सा आकाश सजाया,
जिसमें सूरज, चंदा, तारे।
ऐसा अद्भुत शिल्पकार वह,
धरती और पहाड़ बनाए ।
अद्भुत लीला उसकी देखो,
पत्थर में झरने लहराए।
कैसा सुंदर चित्रकार वह,
रंग-बिरंगे फूल खिलाए ।
काली-काली रातें रँगता,
कभी सुनहरी प्रात बनाए ।
नहीं दिखता कलाकार वह,
क्या है उसका पता-ठिकाना,
मम्मी जी, इक काम करो तुम,
ढूंढों उसको, लेकर आना।
चिंटू, उसको ढूँढूँ कैसे ?
नाम-पता ना ठौर-ठिकाना ।
सबके दिल के भीतर बसता,
नहीं कहीं है आना-जाना ।
हुक्म बजाता दूर बैठकर,
कोई भी कुछ बोल न पाता।
सृष्टि चलाता अपनी सारी,
फिर भी नज़र नहीं वह आता।
- डॉ. शकुंतला कालरा
निष्कर्ष: डॉ. शकुंतला कालरा की यह बाल कविता प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य और सृष्टि की रहस्यमयी शक्ति से परिचित कराती है। सरल भाषा और रोचक संवाद बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाते हुए उन्हें जीवन और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।
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