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मोहित ने समझी भूल : रोचिका अरुण शर्मा


  दीपावली के दिन नज़दीक आ रहे थे | सभी बच्चों की स्कूल की छुट्टियां लग गयी थीं | मोहित की स्कूल भी बीस दिन के लिए बंद थी | सो वह पूरा दिन अपने दोस्तों के साथ में पार्क में इधर-उधर मस्ती करता, क्रिकेट व सतौलिया खेलता |

उस की माँ दीपावली की सफाई में लगी हुई थी | बेकार का सामान कबाड़ वाले को छाँट-छाँट कर दे रही थी और रंग-कली वाले घर में पुताई का काम कर रहे थे | घर का सारा सामान आँगन में फैला पड़ा था |
उस की माँ सुबह से शाम काम कर के थक जाती | कभी कहती “बेटा मोहित सारे दिन मौज-मस्ती करते हो ,थोड़ा मेरे काम में भी हाथ बंटा दो, तो मुझे भी आराम मिले” |
“हाँ माँ” कह मोहित चलता बनता और थोड़ी देर में भूल भी जाता कि माँ ने उस से काम में मदद माँगी थी |
जहाँ वह खेलता वहीं सड़क पर कुछ कुत्ते भी बैठे होते, जो वहीं पैदा हुए और बड़े हुए थे | मोहित उन से भी खूब खेलता और कभी-कभी उन्हें रोटी भी देता | अब वे कुत्ते भी मोहित से बहुत हिलमिल गए थे | वे जैसे ही मोहित को देखते, अपनी दुम हिलाते उस के पीछे दौड़ते| वह भी उन्हें अपने पीछे दौड़ा कर बहुत खुश होता |
शहर में दशहरा मेला लगा हुआ था | मोहित भी अपनी माँ व पिताजी के साथ मेले में गया और पसंद के खिलौने व पटाखे खरीद कर लाया |
नए खिलौनों से खेलना मोहित व उस के सभी दोस्तों को बहुत अच्छा लगता | मोहित रोज अपनी माँ से पटाखों का पैकेट खोलने की जिद करने लगा | उस की माँ ने समझाया “देखो मोहित, दूसरे बच्चे भी तो अभी से पटाखे नहीं चला रहे | तुम भी थोड़ा सब्र रखो और धन तेरस तक इंतज़ार करो |
उस दिन मैं दीये भी जलाऊँगी और तुम्हें पटाखे भी दूँगी | लेकिन मोहित कहाँ मानने वाला था | वह तो चोरी छुपे पटाखे ले कर पार्क में चला गया | उस ने पटाखों की बड़ी लड़ी को सड़क पर बिछाया और उस की बत्ती में आग लगा दी |
जैसे ही बत्ती सुलगी “फट फटा फट” की आवाज के साथ जल उठी | उस में बंधे छोटे-छोटे बम उछल-उछल कर इधर-उधर गिर रहे थे | जिस के कारण सड़क पर बैठे कुत्ते डर के मारे भाग रहे थे |
मोहित व उस के दोस्त पटाखे छुड़ा व कुत्तों को भागते देख कर बड़ा मज़ा ले रहे था | तभी मोहित को एक शरारत सूझी | उस ने पटाखों की लड़ी सड़क पर बैठे एक कुत्ते की पूँछ से बाँध दी और उस की बत्ती में आग लगा दी | कुत्ता पटाखों के फटने की आवाज़ से डर कर दौड़ने लगा, पटाखों की लड़ी भी उस के साथ-साथ दौड़ रही थी |
मोहित व उस के दोस्त उसे देख पेट पकड़ कर हँस रहे थे और उन्हें बहुत आनंद आ रहा था | लेकिन कुत्ते को समझ न आया कि लड़ी उस की पूँछ से ही बंधी है, सो वह बहुत घबराया और डर कर छुपने के लिए मोहित के घर में ही घुस गया | वहाँ उस की माँ ने आँगन में गद्दों को धूप लगाने के लिए फैला रखा था | कुत्ता उन गद्दों पर चढ़ गया और उन में आग लग गयी | गद्दे की रूई धूं-धूं कर जल उठी |
मोहित की माँ ने जब गद्दों में से धुआँ उठता देखा तो उस ने दौड़ कर मोहित के पिताजी को बताया | दोनों ने मिल कर बाल्टियों में पानी भर कर गद्दों के ऊपर डाला और आग बुझाई |
तभी मोहित कुत्ते के पीछे दौड़ते हुए घर को आया | जैसे ही उस ने कुत्ते को वहाँ देखा उसे समझते देर न लगी कि गद्दों में आग कैसे लगी |
उस की माँ ने भी बची हुई लड़ी कुत्ते की पूँछ में बंधी देखी जो कि पानी डालने से गीली हो कर बुझ गयी थी | उस की माँ भी समझ गयी किसी ने कुत्ते की पूँछ में लड़ी बाँधी थी |
तभी मोहित के दोस्त भी वहाँ दौड़ते हुए आ पहुँचे |
सभी को इकट्ठा देख कर मोहित की माँ ने पूछा “ये कुत्ते की पूँछ में लड़ी तुम लोगों ने बाँधी” ?
सभी दोस्तों ने मिलकर कह दिया “आंटी ये शरारत तो मोहित ने की, ये ही घर से पटाखे ले कर आया था” |
मोहित की माँ ने उसे गुस्से से देखा और डांटा “मोहित मैं ने तुम्हें कहा था न कि तुम सब्र करो, फिर भी तुम ने मेरी बात नहीं मानी, अब देख लिया नतीजा | सारा गद्दा जल गया, कुत्ता भी डर गया” | क्या मज़ा आया तुम्हें ये सब कर के ?
मोहित डर के मारे एक कोने में दुबका खड़ा था | वह जानता था कि पिताजी बहुत गुस्सा करेंगे, सो उस ने अपनी माँ से माफी माँगते हुए कहा “माँ मेरे से भूल हो गयी, आप मुझे इस बार माफ़ कर दो, मैं आगे से ऐसी शैतानी नहीं करूँगा” |
उस की बात सुन कर माँ का मन पिघल गया और वह बोली “ यह छोटी सी भूल नहीं है मोहित, घर का सारा सामान आँगन में फैला पड़ा है, यह आग भीषण रूप भी ले सकती थी|
कुत्ते की पूँछ में लड़ी बांधने से वह बेचारा कैसा सहम गया है देखो | वह भी तो एक जीव है, हमें उन्हें सताना नहीं चाहिए” |
“हाँ माँ, मैं आगे से ध्यान रखूँगा” कह मोहित रोने लगा |
उस की माँ ने उस के सिर को सहलाते हुए कहा “इस बार तो मैं तुम्हें माफ़ कर देती हूँ, किन्तु वादा करो कि तुम आगे से बिना पूछे कोई चीज़ घर के बाहर नहीं ले जाओगे और किसी को सताओगे भी नहीं |
मोहित ने कहा “हाँ माँ, मैं वादा करता हूँ, सच पूछो तो मुझे भी बहुत दुःख है” |
इतना कह वह अपनी माँ को काम में हाथ बंटाने लगा |

रोचिका अरुण शर्मा, (चेन्नई)
संपर्क : 9597172444
मेल : sgtarochika@gmail.com

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