सूर्यकुमार पांडेय की 3 प्रसिद्ध बाल कविताएँ: प्यारा मौसम, वर्षा की ऋतु आई और छतरी

Dr. Mulla Adam Ali
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Suryakumar Pandey’s three delightful children’s poems—“Pyara Mausam,” “Varsha Ki Ritu Aai,” and “Chhatri”—beautifully capture the joy, rhythm, and colorful charm of the rainy season. Through simple language, playful sounds, and vivid imagery, these poems bring nature and childhood happiness together.

3 Beautiful Rainy Season Poems for Children by Suryakumar Pandey

सूर्यकुमार पांडेय की 3 प्रसिद्ध बाल कविताएँ प्यारा मौसम, वर्षा की ऋतु आई और छतरी

सूर्यकुमार पांडेय की 3 लोकप्रिय रचनाएँ

बारिश का मौसम बच्चों के लिए उमंग, उल्लास और प्रकृति के रंगों से भरा होता है। सूर्यकुमार पांडेय की ये तीनों बाल कविताएँ—‘प्यारा मौसम’, ‘वर्षा की ऋतु आई’ और ‘छतरी’—वर्षा के इसी मनभावन संसार को सहज, लयात्मक और बालसुलभ भाषा में प्रस्तुत करती हैं। बादलों की रिमझिम, मेंढकों की टर्र-टर्र, मोर का नृत्य और रंग-बिरंगी छतरी बच्चों की कल्पना को आनंद से भर देते हैं। इन कविताओं में प्रकृति के प्रति प्रेम के साथ ध्वनि, लय और चित्रात्मकता का सुंदर मेल दिखाई देता है। प्रस्तुत है सूर्यकुमार पांडेय की वर्षा-ऋतु पर केंद्रित इन तीन मनोरंजक बाल कविताओं का चयन।

प्यारा मौसम: सूर्यकुमार पांडेय की सुंदर वर्षा ऋतु की बाल कविता

सूर्यकुमार पांडेय की बाल कविता ‘प्यारा मौसम’ वर्षा ऋतु के मनोहारी रूप और बालमन के उल्लास को लयात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है। बादलों की रिमझिम, मेंढकों की टर्र-टर्र, मोर का नृत्य और हरी-भरी धरती कविता को जीवंत बना देते हैं। यह कविता ‘बाल भारती’, वर्ष 35, अंक 2, जुलाई 1985 में प्रकाशित हुई थी।

1. प्यारा मौसम


छमछम-छमछम छमछम-छम

नील गगन से बरसा जल। 

किसने बाँधी बादल के-

पाँवों में प्यारी पायल? 


टपटप-टपटप छनन-छनन, 

छत पर है हो रहा कथक। 

 टर्रटर्र-टरटर-टरटर, 

गीत गा रहे हैं मेंढक। 


बिजली चमक रही चम-चम, 

मोर नाचते धरती पर। 

सारी फसलें झूम रहीं, 

पहनी हरी-हरी चूनर। 


ठंडी हवा चली थम-थम, 

आहा, क्या प्यारा मौसम! 

सभी ओर सुर-लय,सरगम, 

नाचें-गाएं संग-संग हम।


वर्षा की ऋतु आई: सूर्यकुमार पांडेय की मनमोहक बाल कविता

‘वर्षा की ऋतु आई’ में सूर्यकुमार पांडेय ने बारिश के आगमन को बच्चों की उमंग और प्रकृति की हलचल के साथ चित्रित किया है। बादलों की गरज, बूँदों की टप-टप, मछलियों की तैराकी और बच्चों का बारिश में नाचना कविता को आनंदमय बना देता है। इसकी सरल भाषा और लय बच्चों को सहज ही आकर्षित करती है।

2. वर्षा की ऋतु आई


गड़-गड़ गड़-गड़ बादल गरजे,

टप-टप टपकीं बूँदें।

लहर-लहर पर मछली तैरी,

मेंढक उछलें- कूदें।


लह-लह-लह फसलें लहराईं,

मह-मह महकी क्यारी।

छप-छप बच्चे नाचे-झूमे,

हँसती धरती सारी।


रुक-रुक शीतल पवन चल रही,

लगती है सुखदाई।

छाते में हम बाहर जाते,

वर्षा की ऋतु आई।


छतरी: सूर्यकुमार पांडेय की लोकप्रिय वर्षा ऋतु की बाल कविता

सूर्यकुमार पांडेय की ‘छतरी’ एक रंगीन, चंचल और बालमन को गुदगुदाने वाली कविता है। लाल, गुलाबी, पीली और नीली छतरी के माध्यम से कवि ने बच्चों की कल्पना और वर्षा के आनंद को रोचक ढंग से अभिव्यक्त किया है। यह कविता पहली बार ‘बाल भारती’, सितंबर 1980 के अंक में प्रकाशित हुई थी।

3. छतरी


लाल, गुलाबी, पीली छतरी

नीली रंग-रंगीली छतरी।


तेज धूप में बाहर आती

नहीं तनिक शर्मीली छतरी।


मोरपंख-सा फैलाती है

एक-एक कर तीली छतरी।


पानी बरसा झम्म-झमाझम

और हो गई गीली छतरी।


इसे खोल कर, गोल नचाया

सूखी छैल-छबीली छतरी।


आँख बचाना, इससे बचना

यह है बड़ी नुकीली छतरी।


- सूर्यकुमार पांडेय

निष्कर्ष; सूर्यकुमार पांडेय की ये तीनों कविताएँ वर्षा के प्राकृतिक सौंदर्य, बालमन की उमंग और खेल-खुशी को सहज लय में अभिव्यक्त करती हैं। सरल भाषा, ध्वन्यात्मक शब्दों और जीवंत बिंबों के कारण ये कविताएँ बच्चों को पढ़ने के साथ प्रकृति को महसूस करने का आनंद भी देती हैं।

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