बुद्धिमान कौआ : सूझबूझ और मेहनत का संदेश देने वाली प्रेरक बाल कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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Wise Crow by Trilok Singh Thakurela is an engaging children's story that highlights the importance of intelligence, patience, and perseverance. Through an interesting adventure, it inspires young readers to solve problems creatively and reminds them that determination and wisdom lead to success.

Wise Crow Story in Hindi | Inspirational Moral Story for Kids

बच्चों की रोचक और शिक्षाप्रद नैतिक कहानी बुद्धिमान कौआ

बुद्धिमान कौआ प्रसिद्ध बाल साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला की एक प्रेरक और मनोरंजक बाल कहानी है। यह कहानी बच्चों को बुद्धिमानी, धैर्य, जिज्ञासा और समस्या-समाधान की शक्ति का महत्व सरल एवं रोचक ढंग से समझाती है। साथ ही, यह संदेश भी देती है कि कठिन से कठिन कार्य भी सूझबूझ और निरंतर प्रयास से सफल बनाया जा सकता है।

बच्चों की रोचक और शिक्षाप्रद नैतिक कहानी

बुद्धिमान कौआ

एक कौआ एक दिन उड़ता उड़ता दूर किसी जंगल में पहुँचा। जंगल में तरह तरह के पेड़-पौधे थे। जिन पर तरह तरह के सुन्दर फूल और फल लगे हुए थे। वहाँ कई प्रकार के जीव जन्तु थे।

कौआ को वहाँ एक अखरोट का पेड़ मिला। उस पर अखरोट पर फल लगे थे। कौआ उस पेड़ के बारे में कुछ भी नहीं जानता था। उस पेड़ पर एक नन्ही चिड़िया बैठी थी।

कौआ ने उस नन्ही चिड़िया से पूछा – “बहन तुम यहीं रहती हो?”

नन्ही चिड़िया ने कहा – “यहाँ से थोड़ी दूर एक अशोक का पेड़ है। उसी पेड़ पर मेरा घोंसला है? “

“क्या तुम वहाँ अकेले रहती हो?” कौआ ने पूछा।

“नहीं, अकेले क्यों? वहाँ हमारी पूरी बस्ती है। अशोक के पेड़ पर बहुत से घोंसले हैं। उन घोंसलों में बहुत सारी चिड़ियाॅं रहती हैं।“ चिड़िया ने बताया।

“अच्छा? “ कौआ ने आश्चर्य से पूछा।

“हाॅं । भला, अकेले रहने में क्या सुख है? हम सब उस पेड़ पर बहुत मेल से रहती हैं। शाम को सारी चिड़ियाॅं एक साथ मिलकर झूम झूम कर गीत गाती हैं। हमारे साथ साथ अशोक का पेड़ भी झूमने लगता है।“ चिड़िया ने चहककर कहा।

“लेकिन अशोक के पेड़ पर ही क्यों? यहाँ जंगल में तो बहुत सारे पेड़ हैं। तुम लोग तो किसी भी पेड़ पर रह सकती हो ।“ कौआ ने फिर प्रश्न किया।

चिड़िया मुस्कराई, फिर बोली – “ भैया, आपकी बात तो सही है, किन्तु हमें अशोक का पेड़ ज्यादा सुन्दर लगता है। वहाँ पास में ही पानी का तालाब है। जब भी प्यास लगती है, तो वहाँ आसानी से पानी पिया जा सकता है। “

“हाॅं, यह बात तो सही है।“ कौआ ने चिड़िया की हाँ में हाँ मिलायी।

“एक बात और। “ नन्ही चिड़िया बोली।

“कौन सी बात?” कौआ ने पूछा।

“अशोक के पेड़ पर हमारे घोंसले उसकी पत्तियों में छिपे रहते हैं। इसलिए हम वहाँ सुरक्षित रहते हैं।“ चिड़िया बोली ।

चिड़िया ने कौआ से पूछा – “भैया,इस जंगल में आप कहाँ रहते हो?”

“मैं इस जंगल में नहीं रहता, बहन। मैं तो इस जंगल में पहली बार आया हूँ।“ कोए ने बताया।

“पहली बार आये हो? तब आप कहाँ रहते हो? “ चिड़िया ने पूछा।

“मैं दूर गाँव से आया हूँ, बहन। गाँव में नीम के पेड़ पर मेरा घोंसला है” कोए ने जबाब दिया।

चिड़िया कुछ शंकित हुई। उसने कोए से पूछा – “फिर यहाँ क्यों आये हो, भैया?”

“ छोटी बहन, मैंने सुना था कि जंगल बहुत सुन्दर होता है। वहाँ अनेक प्रकार के वृक्ष और लताएँ हैं,जो देखने वाले का मन मोह लेते हैं। मैंने यह भी सुना था कि जंगल में अनेक तरह के पशु पक्षी रहते हैं। मेरे एक मित्र ने यह भी बताया था कि जंगल में तरह तरह के फल मिलते हैं। बहुत मीठे और स्वादिष्ट फल। मेरा मन हुआ कि मैं जंगल को पास जाकर देखूँ। “ कौआ ने एक ही साॅंस में कह दिया।

“तो कैसा लगा, जंगल? क्या यहाँ कुछ अच्छा लगा? “ चिड़िया ने पूछा।

“बहुत अच्छा लगा, नन्ही बहन। जंगल के बारे में जैसा सुना था, वैसा ही पाया है।“ कोए ने कहा।

कोए ने फिर आगे कहा- “ मैंने गाँव में इतने पेड़ नहीं देखे थे। मैं तो इन पेड़ों का नाम तक नहीं जानता। मुझे नहीं पता कि जिस पेड़ पर तुम बैठी हो, वह कौन सा पेड़ है?”

“यह अखरोट का पेड़ है, भैया। इसके फल बहुत स्वादिष्ट होते हैं।“ चिड़िया ने बताया।

“अच्छा? तब तुम रोज अखरोट खाती होगी? “ कोए ने चिड़िया से पूछा।

“ नहीं,भैया। अखरोट के फल तो बहुत कठोर होते हैं। मैं तो न इन्हें पेड़ से तोड़ सकती हूँ और नहीं इन्हें फोड़कर खा सकती हूँ । हाॅं, बंदर इन्हें खूब खाते हैं, पत्थर पर तोड़कर। “ चिड़िया बोली।

“ तब तुम्हें कैसे पता चला, नन्ही बहन कि अखरोट का फल स्वादिष्ट होता है। “ कौआ ने जानना चाहा।

चिड़िया ने बताया – “बंदर जब अखरोट के फल को पत्थर से तोड़ कर खाते हैं, तब अखरोट के नन्हे टुकड़े धरती पर बिखर जाते हैं। बंदरों के चले जाने पर वह टुकड़े मैंने खाये हैं।“

“ मैं भी अखरोट खाना चाहता हूँ, नन्ही बहन।“ कौआ बोला।

नन्ही चिड़िया ने कहा-“ अभी तो यहाँ बंदरों से बचे अखरोट के टुकड़े नहीं हैं। हाँ, अखरोट के कुछ फल जमीन पर पड़े हैं। उधर देखो, क्या आपको वहाँ जमीन पर दो अखरोट दिखाई दे रहे हैं? उधर पूरब की ओर?”

कौए ने देखा जमीन पर अखरोट के दो फल पड़े हुए थे।

“हाँ, हैं तो सही।“ कौआ बोला।

चिड़िया ने कहा – “ पर इन्हें तोड़ना आसान नहीं है। अगर तोड़ सको तो खा लो।“

कौआ ने अखरोट के फल को तोड़ने की कोशिश की, पर वह अखरोट के फल को तोड़ नहीं सका।

कौआ के मन में अखरोट खाने की इच्छा बढ़ने लगी। उसने पहले एक अखरोट को चोंच से दबाकर तोड़ने की कोशिश की, पर अखरोट नहीं टूटा। उसके बाद कौआ ने अखरोट को चोंच से पकड़कर पास पड़े पत्थर पर मारकर तोड़ने की कोशिश की, परन्तु अखरोट फिर भी नहीं टूटा।

“ भैया, अखरोट का छिलका बहुत कठोर होता है। यह आसानी से नहीं टूटता।“ नन्ही चिड़िया ने कोए से कहा।

“पर नन्ही बहन, मैं तो आज अखरोट खाकर ही जाऊँगा। मैं देखना चाहता हूँ कि इसका स्वाद कैसा होता है।“ कौआ ने कहा।

अबकी बार कौआ अखरोट को चोंच से पकड़कर जमीन से कुछ मीटर ऊपर उठा और उसने अखरोट को एक पत्थर के ऊपर पटक दिया, किन्तु अखरोट फिर भी नहीं टूटा। इतना होने पर भी कौआ हताश नहीं हुआ। वह अखरोट की डाल पर बैठ गया। डाल पर बैठकर वह सोचने लगा कि अखरोट कैसे तोड़ा जाये। सहसा उसे जंगल के पास पक्की सड़क दिखाई दी। उस पर मोटरसाइकिल, कार, बस, ट्रक आदि अनेक वाहन आ जा रहे थे।

कौआ के मन में एक विचार आया। उसने अखरोट को चोंच से पकड़ा और सड़क पर रख दिया। तभी वहाँ से एक कार गुजरी। अखरोट कार के टायर के नीचे दब गया। उसका छिलका टूट गया। कौआ बहुत खुश हुआ।

“अखरोट टूट गया, नन्ही बहन।“ कौआ खुशी से चिल्लाया।

“ बहुत अच्छा हुआ।“ नन्ही चिड़िया ने अखरोट की डाल पर बैठे-बैठे ही कहा।

कौआ ने अखरोट खाया। उसे अखरोट का स्वाद बहुत अच्छा लगा।

“अखरोट बहुत मीठा है, नन्ही बहन।“ कौआ ने ऊॅंची आवाज में कहा।

“मेहनत का फल मीठा ही होता है, बड़े भैया।“ इतना कहकर चिड़िया अखरोट की डाल से अपने घोंसले की ओर उड़ चली।

इसके बाद कौआ भी अपने गाँव की ओर लौट गया।

- त्रिलोक सिंह ठकुरेला

निष्कर्ष; बुद्धिमान कौआ बच्चों को सिखाती है कि धैर्य, बुद्धिमानी और निरंतर प्रयास से हर कठिनाई का समाधान खोजा जा सकता है। यह प्रेरक कहानी जीवन में सूझबूझ और मेहनत के महत्व को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।

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