बिल्लू और टिल्लू खरगोश: डर पर जीत की शिक्षाप्रद बाल कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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Billu Aur Tillu Khargosh is an inspiring children's story by Dr. Rakesh Chakra. Through the adventures of two rabbits, the story teaches young readers that courage, confidence, and positive thinking can help overcome fear.

Billu and Tillu Rabbits | A Motivational Moral Story for Children's

billu and tillu rabbit's story in hindi

'बिल्लू और टिल्लू खरगोश' डॉ. राकेश चक्र की एक प्रेरक बाल कहानी है, जो बच्चों को डर, साहस और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण संदेश देती है। खरगोशों बिल्लू और टिल्लू की रोचक कथा के माध्यम से लेखक बताते हैं कि मन में बैठा भय वास्तविकता से कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है। सरल भाषा, रोचक घटनाओं और प्रभावशाली संदेश से भरपूर यह कहानी बच्चों में निर्भयता, विवेक और सकारात्मक सोच का विकास करती है।

बच्चों के लिए प्रेरणादायक कहानी

बिल्लू और टिल्लू खरगोश

    डॉ प्रदीप नए-नए शोध पशु-पक्षियों के मनोविज्ञान को लेकर करते रहते। उनके मित्र राहुल ने दो खरगोश अपने बगीचे में पाले हुए थे, बगीचा काफी बड़ा था। पंछियों की चहचहाट से पूरे दिन बगीचा जीवंत बना रहता। वे उनके लिए दाना-पानी रोज रखते। उन्होंने एक खरगोश का नाम बिल्लू और दूसरे का टिल्लू रख लिया था। वे और उनका पूरा परिवार खरगोशों से खूब मौज मस्ती करता रहता। उनका बेटा आर्यन तो कुछ ज्यादा ही करता। कदाचित बिल्लू को बिल्ली से बहुत डर लगता, तो टिल्लू को कुत्ते से। जब-जब बिल्लू को बिल्ली दिख जाती, वह प्राण बचाकर छिपने की कोशिश करता। उसका कारण यह था कि एक दिन बिल्ली ने उस पर इसलिए हमला कर दिया कि इसे तो सभी प्यार करते हैं, मुझे कोई नहीं करता, बल्कि मुझे तो देखते ही भगाने लगते हैं। आज मुझे चूहों का शिकार भी नहीं मिल पाया। भूख भी लगी है। यह सब सोचकर बिल्ली ने उस पर बहुत जोरदार हमला कर दिया , उसने अपने को अपनी चुस्ती फुर्ती से किसी तरह बचाया। बचाते-बचाते भी वह हल्का-सा घायल हो गया। बिल्ली हमला करके तुरंत रफूचक्कर हो गई। राहुल ने बाद में उसका घरेलू इलाज किया, वह ठीक हो गया, लेकिन जब कभी बिल्ली कहीं से भी आ जाती, वह तुरंत दुबककर अपनी जान बचाता। अब उसे बिल्ली से बहुत डरने लगा था। बल्कि उसके मन में बुरी तरह डर बैठ गया था। यदि वह उस दिन बिल्ली से न डरता और कुछ मुकाबला करने या उसे डराने की कोशिश करता तो बिल्ली उस पर हमला करने की हिम्मत न जुटा पाती।

डर कितना भयानक भूत होता है। यह हम सब जानते ही हैं, बल्कि उन बच्चों और बड़ों को भूत का भय कुछ ज्यादा ही सताता है, जिनके माता-पिता अपने बच्चों को भूत या पुलिस आदि का भय दिखाकर बचपन में डराते रहते हैं।

डॉ प्रदीप प्रैक्टिकल करके अपने मित्र को बताना चाहते थे कि मन में बैठा डर कितना भयानक होता है कि पशु या मनुष्य किसी पुतले आदि को भी अँधरे में देख लें तो वे देखकर ही बेहोश हो जाते हैं और डर के कारण ही कभी-कभी प्राण भी गंवा देते हैं।

उन्होंने एक बिल्लीनुमा पुतला बनाया, और उसे एक कमरे के एक कोने में रख दिया। रात्रि में दोनों खरगोशों बिल्लू और टिल्लू को उस कमरे के अंदर बंद कर दिया और बल्ब भी बंद कर दिया। कुछ देर तो दोनों बातचीत करते रहे। लेकिन यकायक बिल्लू की दृष्टि उस पुतले पर पड़ी तो वह बहुत डरने लगा, लेकिन टिल्लू ने समझाया कि डरना मत ,कुछ नहीं होगा यह बिल्ली का पुतला है, लेकिन उसे तो बिल्ली का भूत पहले से ही सवार था। बिल्लू निष्प्राण-सा बेहोश हो गया। वह तो ईश्वर की ही कृपा थी कि प्राण पखेरू नहीं उड़े।

 सुबह जब कमरा खोला गया तो टिल्लू मस्ती करता राहुल की गोद में आ गया, लेकिन बिल्लू तो बेहोश पड़ा हुआ था, अनहोनी की पूरी संभावना थी। उसे डॉ प्रदीप ने खूब हिलाया- डुलाया, साथ ही पानी के छींटे मारे तो वह होश में आ गया। सबको अपने पास पाया देखकर वह बहुत खुश हो गया।

जब उसे पास बैठाकर बिल्ली का पुतला दिखाया तो उसका डर जाता रहा।

 टिल्लू ने कहा, “बिल्लू मैं तुमसे यह कह ही रहा था कि यह बिल्ली का पुतला है। तुम डरो मत।“

बिल्लू ने कहा, “तुम सही कह रहे थे भैया यह बिल्ली का पुतला है। मुझे बिल्कुल भी नहीं डरना चाहिए था।

टिल्लू ने साहस दिखाते हुए कहा,” मैं न अब कुत्ते से डरूँगा और न तुम कभी बिल्ली से डरना।“

आर्यन ने कहा, “मेरी मम्मी कहानी सुनाती हैं कि जो वीर और साहसी होते हैं, उन्हें भूत-वूत से कभी डर नहीं लगता।“

नन्हे आर्यन की जब बड़ी बात उसके पापा ने सुनी तो आर्यन को अपनी गोद में उठाकर खूब प्यार करने लगे।

 बाद में आर्यन अपने प्यारे खरगोशों के साथ-साथ खेलने लगा था।

- डॉ. राकेश ‘चक्र’

निष्कर्ष; यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि डर पर साहस और सही समझ से विजय पाई जा सकती है। आत्मविश्वास और विवेक ही भय को दूर करने का सबसे प्रभावी उपाय हैं।

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