महात्मा गांधी पर 10 बाल कविताएँ | बापू की कविताएँ | सूर्यकुमार पांडेय

Dr. Mulla Adam Ali
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These eight inspiring poems by Suryakumar Pandey introduce children to Mahatma Gandhi’s life, ideals, and contribution to India’s freedom struggle. Written in simple and engaging language, the poems highlight Gandhi’s values of truth, non-violence, compassion, equality, and patriotism, making them meaningful for young readers.

10 Best Mahatma Gandhi Poems for Kids | Inspirational Poems on Bapu

बापू के जीवन और आदर्शों पर 10 प्रेरक कविताएँ

बापू के जीवन और आदर्शों पर 10 प्रेरक कविताएँ

महात्मा गांधी के जीवन, विचारों और स्वतंत्रता-संग्राम में उनके योगदान को सरल, सरस और बालमन के अनुकूल शब्दों में प्रस्तुत करती हैं सूर्यकुमार पांडेय की ये बाल कविताएँ। सत्य, अहिंसा, करुणा, समानता और देशप्रेम जैसे जीवन-मूल्यों को सहज ढंग से अभिव्यक्त करती ये रचनाएँ बच्चों को बापू के व्यक्तित्व और आदर्शों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें मानवीय मूल्यों के प्रति प्रेरित भी करती हैं। ‘चंपारण सत्याग्रह’ जैसी पद्य-कथा गांधीजी के संघर्ष और किसानों के प्रति उनकी संवेदना को रोचक ढंग से सामने लाती है। प्रस्तुत कविताएँ बाल पाठकों के लिए ज्ञान, संस्कार और प्रेरणा का सुंदर संगम हैं।

महात्मा गांधी पर बाल कविताएँ

अमर रहेगा नाम कविता महात्मा गांधी के सरल जीवन, सत्य-अहिंसा और देश के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करती है। बालमन को बापू के आदर्शों से परिचित कराने वाली यह रचना प्रेरणादायी है।

1. अमर रहेगा नाम

अंग्रेजों की क्रूर गुलामी से हम सबको करने दूर। 

एक महामानव धरती पर आया, ताकत थी भरपूर। 

दया और करुणा की मूरत, सत्य-अहिंसा थे हथियार। 

जिसके बल पर गए फिरंगी, वापस सात समंदर पार। 

जिसको जंग पसंद नहीं थी, न ही तोप, गोला, बारूद।

सादा जीवन जीता था वह, पीता था बकरी का दूध। 

आंखों पर चश्मा, हाथों में लाठी, थी जिसकी पहचान।

पहनी एक लंगोटी, चादर ओढ़ी, खूब मिला सम्मान। 

नाम महात्मा गांधी उसका, युग-युग अमर रहेगा नाम। 

दो अक्टूबर जन्मदिवस पर, उस बापू को करें प्रणाम। 


अमर कहानी बापू की कविता में गांधीजी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और सत्य-अहिंसा की शक्ति को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। कविता बच्चों में देशप्रेम और त्याग की भावना जगाती है।

2. अमर कहानी बापू की

जब भारत मां के आंगन में गोरों का सिक्का चलता था।

जब अंग्रेजों के शासन का सूरज न कभी भी ढलता था।

तब बापू ने था जन्म लिया, भारत का पौरुष जागा था।

इस धरती से तब राजपाट को छोड़ फिरंगी भागा था।

बापू के पीछे निकल पड़ा था भारत का जन-मन सारा।

गूंजा स्वदेश की माटी में शुभ सत्य-अहिंसा का नारा।

है युद्ध बिना हक कब मिलता यह बात सभी ने बतलाई।

पर आजादी हथियार बिना बापू ने हमको दिलवाई।

याद रहेगी युग-युग तक जन-जन को कुर्बानी बापू की। 

हम सदियों भूल न पाएंगे यह अमर कहानी बापू की।


गांधी आते हैं बहुत याद कविता में समाज में हिंसा, असत्य और आपसी वैमनस्य बढ़ने पर गांधीजी के विचारों की प्रासंगिकता को यह कविता प्रभावशाली ढंग से सामने रखती है। यह बाल पाठकों को शांति और सत्य का महत्व समझाती है।

3. गांधी आते हैं बहुत याद

होते जब भी दंगे-फसाद,

बढ़ता है जब आतंकवाद।

उन्माद करे जब घोर नाद,

गांधी आते हैं बहुत याद।


घिरता है जब घनघोर तिमिर,

चिन्ता के बादल जाते घिर।

है राह कोई सूझती न फिर,

जब हिंसक हो उठते विवाद।

गांधी आते हैं बहुत याद ।


जब संकट के पर्वत टूटे,

अपने ही अपनों को लूटे।

जब बढ़ते ही जाएँ झूठे,

करता असत्य जब-जब निनाद।

गांधी आते हैं बहुत याद ।


बापू कविता में गांधीजी के व्यक्तित्व, करुणा, समानता, खादी और स्वतंत्रता-संग्राम से जुड़े प्रसंगों को सरल एवं सहज भाषा में प्रस्तुत करती यह कविता बच्चों के लिए बापू का प्रेरक परिचय है।

4. बापू   

सबके प्यारे थे बापू।

देश दुलारे थे बापू।


जग के लिए दया भरपूर,

छुआछूत से रहते दूर।

सब समान हिन्दू-इस्लाम,

'रघुपति राघव राजाराम'

प्रतिदिन गाते थे बापू।

नियम निभाते थे बापू।


करुणा, ममता के अवतार,

आजादी से उनको प्यार।

साथ अहिंसा थी हथियार,

गए फिरंगी सागर पार।

सच-सच कहते थे बापू।

हंसते रहते थे बापू।


खादी, चरखा लेकर हाथ,

असहयोग आंदोलन साथ।

भारत में जब फूंका मंत्र,

देश हमारा हुआ स्वतंत्र।

बड़े निराले थे बापू।

हिम्मत वाले थे बापू।।


बंदर तीन कविता में गांधीजी के तीन बंदरों के माध्यम से बुरी बातों से दूर रहने और अच्छे संस्कार अपनाने का संदेश दिया गया है। छोटी और सरल यह कविता बच्चों को सहज ढंग से जीवन-मूल्यों से जोड़ती है।

5. बंदर तीन

गांधी जी की लाठी एक, 

चलते थे वह जिसको टेक।


याद हमें अक्टूबर दो,

जन्म हुआ था जिस तिथि को।


गांधी जी के बंदर तीन,

शिक्षा देते हमें नवीन।


याद रखें हम बातें चार 

सत्य, अहिंसा, समता, प्यार।

महात्मा गांधी पर बाल कविताएँ

बापू लाए आजादी कविता में चरखा, खादी, सत्य और अहिंसा के माध्यम से गांधीजी के स्वतंत्रता-संग्राम को यह कविता बालमन के अनुरूप प्रस्तुत करती है। इसमें बापू के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव दिखाई देता है।

6. बापू लाए आजादी

चरखे पर अपने हाथों से,

काता करते थे वह खादी।

मानवता के भटके पथ पर, 

सत्य अहिंसा ज्योति जला दी।


तन से दुबले, मन से सच्चे,

संकल्पों के पक्के गांधी।

बार बार है नमन, धन्य-

बापू जो ले आए आजादी।


बापू की पहचान कविता में चश्मा, लाठी, लँगोटी और घड़ी जैसे गांधीजी से जुड़े परिचित प्रतीकों के माध्यम से यह कविता उनके व्यक्तित्व का सरल चित्र खींचती है। बाल पाठकों के लिए यह रचना रोचक और सहज स्मरणीय है।

7. बापू की पहचान

आँखों पर चश्मा, हाथों में लाठी, 

बापू की पहचान।

पहनी एक लँगोटी, फिर भी, 

सारे जग में बने महान।


हँसी पोपले मुँह में जिनके,

लगती है हमको प्यारी।

घड़ी कमर में लटक रही है,

बापू जी की बलिहारी।


अगर आज गाँधी जी होते कविता में वर्तमान समाज में हिंसा, झूठ, अशांति और विभाजन के बीच गांधीजी के विचारों की आवश्यकता पर विचार करती है। सत्य, न्याय और एकता का संदेश इसे सार्थक बनाता है।

8. अगर आज गाँधी जी होते

अगर आज गाँधी जी होते!


कदम-कदम पर झूठ देखकर,

जाति-धर्म की फूट देखकर,

नहीं एक पल भी वो सोते।

अगर आज गाँधी जी होते!


युद्ध अशान्ति, देश में झगड़े,

हिंसा, जाति, धर्म के लफ़ड़े,

देख-देखकर नयन भिगोते।

अगर आज गाँधी जी होते!


बम, बन्दूक़, छुरे की भाषा,

उग्रवाद का देख तमाशा,

सत्य-न्याय के बिरवे बोते।

अगर आज गाँधी जी होते!


सत्याग्रह, अनशन के द्वारा,

करते वे कल्याण हमारा,

एक सूत्र में हमें पिरोते।

अगर आज गाँधी जी होते!


'बाल भारती' पत्रिका के वर्ष:71, अंक:5, अक्टूबर, 2018, पृष्ठ: 18 पर प्रकाशित चंपारण सत्याग्रह पद्य-कथा के रूप में रची गई यह कविता चंपारण के किसानों की पीड़ा और गांधीजी के संघर्ष को रोचक ढंग से प्रस्तुत करती है। यह बच्चों को इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना से परिचित कराती है।

9. चंपारण सत्याग्रह (पद्य कथा)

राजकुमार शुक्ल चंपारण के किसान थे एक ग़रीब।

भले नील की खेती करते, लेकिन फूटे हुए नसीब ।।


निलहे गोरे गाँव-गाँव में ज़ुल्म किया करते भारी।

परेशान करते थे सबको, आ-आ कर अत्याचारी।।


सुना उन्होंने, गांधी जी कांग्रेस-अधिवेशन में आए।

राजकुमार शुक्ल उनसे मिलने लखनऊ शहर धाए।।


गए कानपुर जब गांधी जी, किया शुक्ल जी ने पीछा।

अपनी तरफ़ महात्मा जी का ध्यान उन्होंने यों खींचा।।


बोले-''चंपारण चलिए,बापू बस यही कृपा करिए।

हम ग़रीब नील के किसानों की दुर्दशा आप हरिए।।"


हुए द्रवित गांधी जी, बोले-"चंपारण मुझको आना।

मैं कलकत्ते आऊँगा, तुम मुझे वहाँ से ले जाना।।"


गांधी जी से पहले पहुँच गए कोलकाता राजकुमार।

उन्हें साथ लेकर पटना वाली गाड़ी पर हुए सवार।।


पटना में राजेंदर बाबू के घर दोनों लोग गए।

सरल स्वभाव बिहार प्रांत का देखा, अनुभव मिले नए।।


वहाँ वकीलों से मिलकर गांधी जी ने हालत जानी।

कैसे तीन बटा बीस खेती पर गोरे करते मनमानी।।


इसे 'तीन कठिया'कहते थे, नील उगाना था अनिवार्य।

यह क़ानून रद्द करवाना होगा, पर मुश्किल था कार्य।।


गांधी जी धुन के पक्के थे, उनसे हर मुश्किल हारी।

गये मुज़फ़्फ़रपुर, तिरहुत, फिर पहुँच गए मोतीहारी।।


नील मालिकों और फ़िरंगी अफ़सरान से मिले वहाँ।

बात नहीं कोई बन पाई, बहुत कठिन था काम यहाँ।।


गांधी जी पर चला मुक़दमा, गोरों की ताक़त हारी।

गाँव गाँव में जाकर गांधी जी ने जाँच रखी जारी।।


तब बिहार का लाट गवर्नर सर एडवर्ड गेट था नाम।

उसने भेजा पत्र कि मुझसे मिलिए, सुलझाऊँगा काम।।


हुई गेट से भेंट, कमेटी एक बनी इस हेतु तुरंत।

सौ सालों से बाद तीन कठिया का ऐसे आया अंत।।


हार मान ली अंग्रेज़ों ने, गूँजा गांधी का जयगान।

रद्द हुआ क़ानून, ख़ुश हुए चंपारण के नील किसान।।


प्यारे बापू जिंदाबाद! कविता में जोशीली और सरल भाषा में लिखी यह कविता गांधीजी के नेतृत्व और स्वतंत्रता-संग्राम में उनके योगदान को स्मरण करती है। कविता में देशभक्ति और बापू के प्रति सम्मान का उत्साहपूर्ण स्वर है।

10. प्यारे बापू जिंदाबाद!

गांधी जी की आंधी आई,

जिसने हमको राह दिखाई।

ब्रिटिश हुकूमत थी थर्राई,

भारत ने आजादी पाई।

बीता अंग्रेजों का राज,

उसका जन्म दिवस है आज।

प्यारे बापू जिंदाबाद!


 सत्य अहिंसा थे हथियार,

सुनकर गांधी की ललकार, 

डरी फिरंगी की सरकार,

भागी सात समंदर पार।

जिसने गढ़ा स्वतंत्र समाज,

उसका जन्म दिवस है आज।

प्यारे बापू जिंदाबाद!


- सूर्यकुमार पांडेय

निष्कर्ष; सूर्यकुमार पांडेय की ये बाल कविताएँ गांधीजी के जीवन और विचारों को सरल, रोचक और प्रभावशाली ढंग से बच्चों तक पहुँचाती हैं। सत्य, अहिंसा, प्रेम और समानता का संदेश देती ये रचनाएँ बालमन में बापू के आदर्शों के प्रति सम्मान और प्रेरणा जगाती हैं।

ये भी पढ़ें; बापू के लिए लिखी गई कविता : Bapu Hindi Kavita For Mahatma Gandhi

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